इंडोनेशियाई में मिली 7 हजार साल पुरानी महिला की ममी – वैज्ञानिकों को हुआ आश्चर्य, साइबेरिया से संबंध के मिले सबूत।

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ममी का इतिहास काफी पुराना रहा है, साथ ही इसके कई रहस्य भी छुपे हुए है। जिन्हें आज तक कोई नही सुलझा पाया है। इस पर लगातार रिसर्च भी होती रहती है, एक ऐसी इंडोनेशिया में पाई गई महिला की ममी है जो करीब 7 हजार साल पुराणी बताई जा रही है।

इंडोनेशिया में 7 हज़ार वर्षो पुरानी महिला के शरीर ने इंसान इतिहास को लेकर बहुत ही अकल्पनीय तथ्य सामने आये है। उसके शरीर से जो अनुवांशिक निशान मिले हैं वह इंडोनेशिया में बहुत ही पहले समय में रहने वाले इंसानों और साइबेरिया में रहने वाले इंसानों के बीच मेल खाते है। रिसर्च में यह समझने के प्रयाश किये जा रहे है की, इंडोनेशिया की महिला का साइबेरिया से कैसे संपर्क हुआ।

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इसके इतिहास के बारे मेंवैज्ञानिक जानकारी जुटा रहे है। हजारों किलोमीटर दूर रहने वाले साइबेरिया के लोगों के बीच में मिश्रण वैज्ञानिकों के अनुमान से काफी पहले ही हो गया था। प्रारंभिक मानव प्रवास के सिद्धांतों को डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (डीएनए) अनुवांशिक फिंगरप्रिंट के विश्लेषण के बाद पहले की थी थियोरी बदल चुकी है।

अध्यन में सामने आया की, संभावना है कि वालेसिया क्षेत्र में शुरुआती समय मैं दो होमोसेपियंस प्रजाति का मिलन हुआ होगा और फिर डेनिसोवांस यानी (उप प्रजाति) का निर्माण हुआ होगा। महिला की यह बॉडी इंडोनेशिया के सुलावैसी में चट्टानों के बीच काफी सुरक्षित अवस्था में प्राप्त की गयी है।

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इसको हाथों से काफी सुरक्षित तरीके से धार्मिक रिवाजों के साथ चट्टानों के बीच लिंग पन्नीज गुफा में हाथों से दफनाया गया था, जा से इसको पाया गया है। इस महिला की बॉडी को वैज्ञानिकों ने “बेसे” नाम दिया था जिसका मतलब इंडोनेशिया की भाषा में नवजात बच्ची होता है, इसकी बॉडी उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में होने के कारण यह संरक्षित नमूनों में से एक है।

अधिकतर रिसर्च में पाया गया की 3500 साल पहले ही उत्तरी एशिया के लोग जिन्हें डेनीसोवन कहां जाता है वह दक्षिणी पूर्वी एशिया की तरफ गए होंगे। लेकिन डीएनए ने प्रारंभिक मानव प्रवासन के पैटर्न के सिद्धांतों को बदल दिया। दक्षिणी सुलावेसी में हसनुद्दीन विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर “इवान सुमंत्री ने कहा शुरू में इंसानों के माइग्रेशन को लेकर जो भी सिद्धांत हैं वह बदलेंगे ही क्यों की नस्ल को लेकर जो सिद्धांत हैं वह भी बदल रहे हैं।

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तुर्की में की गयी खुदाई के दौरान कई कलाकृति सामने आई है। 11000 वर्ष पुरानी मूर्तियों पर बेमिसाल नक्काशी भी देखने को मिली है। बताया जा रहा है की, उस समय कारीगर और कलात्मक के प्रति लोगों में काफी ज्यादा कलात्मक कौशलता थी।

मूर्तियों के साथ साथ यहा 250 से ज्यादा टी आकार के बड़े-बड़े पत्थर और 758 मीटर व्यास और 18 फीट गहरी एक बहुत प्राचीन इमारत मिली है। इस खोज को नवपाषाण युग के बारे में एक बहुत ही महत्वपूर्ण खोज माना जा रहा है। बताया जा रहा हिया की खुदाई से गोबेकली टेप में मिली चीजों के बारे में भी काफी कुछ समझने को मिलेगा, जिसके बारे में अभी रिसर्च जारी है।

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