विधवाओं से बसा ऐसा गांव जहां एक भी पुरुष नहीं बचा ।

Untold Story

क्या आप को हमारे भारत देश में मौजूद ऐसे गांव के बारे में पता है, जहां के घरों में रहने वाली महिलाएं ज्यादातर विधवा रहती हैं। इस गांव में रहने वाले पुरुष यदि वे समय पर कर्ज नहीं चुका पाते हैं, तो आत्महत्या कर लेना ही उन्हें ज्यादा उचित लगता है।

जी हां आज हम आपको ऐसे ही एक गांव के बारे में बताने जा रहे हैं।

हमारे भारत देश के उत्तर पश्चिम में मौजूद एक राज्य पंजाब में मौजूद कई गांव ऐसे हैं, जहां किसी भी परिवार में अब कोई भी पुरुष जीवित नहीं बचा है। इन गांव में मौजूद जितने भी पुरुष थे, वे समय पर कर्ज नहीं चुका पाने के कारण आत्महत्या कर चुके हैं और अब लोग इन्हें विधवाओं का गांव भी कहने लगे हैं।

कोट धर्मु गांव

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पंजाब के मानसा जहां के कोट धर्मु गांव में एक ऐसा किसान परिवार मौजूद है, जो इस हादसे का शिकार हो चुके हैं, किसान नाज़र सिंह। अब तो केवल नाज़र सिंह जी की यादें ही बाकी हैं, जिस पेड़ के नीचे नाज़र सिंह ने कभी अपने बेटे राम सिंह को किसानी के गुण सिखाए थे, उसी पेड़ में उन्होंने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। कुछ समय बाद इसी साल उनके बेटे ने भी सल्फर की गोलियां खाकर अपनी जान दे दी। उन्होंने महज अपनी जान इसलिए दे दी क्योंकि उनके सिर पर ₹4 लाख रुपए का कर्ज था और वे इस कर्ज को चुकाने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थे।

गांव के सभी घरों में है बिल्कुल यही कहानी

ऐसे ही दिलों को मायूस व आंखों को नम कर देने वाली कहानी पंजाब के लगभग हर गांव की है। ऐसे ही दर्दनाक कहानी कोट धरमू गांव के किसी एक परिवार की नहीं बल्कि यह कहानी इस गांव में मौजूद लगभग सभी परिवार की है। एक-एक करके समय पर कर्ज ना चुका पाने के कारण अधिकांश ने आत्महत्या का रास्ता अपना लिया।

ऐसा ही एक परिवार किसान रंजीत सिंह का भी है। जिन्होंने किसानी के लिए कर्ज लिया था और यही कर्ज बढ़ते बढ़ते 11 लाख रुपए तक पहुंच गया और ऊपर से बेटे की बीमारी ने तो और कमर तोड़ कर ही रख दी। एक दिन रंजीत सिंह खेती करने अपने खेत तो पहुंचे मगर वापस घर नहीं आए उन्होंने अपने खेत में ही अपनी जान दे दी।

सरकार को किसानों के आत्महत्या करने पर रोक लगानी चाहिए।

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पंजाब का यह दर्दनाक मामला अब पूरे देश में किसानों के लगातार आत्महत्या की वजह से बदनाम होता जा रहा है। मानसा के कोठधर्मु गांव में कुल 4000 हज़ार वोटर्स रहते हैं लेकिन इनके बीच अब तक कुल 20 से २५ किसान आत्महत्या कर चुके हैं आरोप तो यह भी है कि इन किसानों को कपास के फसलों को कम से कम दामों में बेचने के लिए मजबूर किया जाता है। इन सबके अलावा मौसम की मार एवं सरकार की लापरवाह नजरिए के वजह से इन किसानों के पास आत्महत्या के बजाय और कोई उपाय भी नहीं बचता है।

किसानों के आत्महत्या करने की वजह से सरकार ने मुआवजा भी तय कर रखा है परंतु सरकार की लापरवाही के वजह से यह सभी कागजी कार्रवाई में दबकर ही रह जाती हैं। भारत को एक कृषि प्रधान देश तो कहा जाता है, परंतु भारत के किसान जिस तरह से कर्ज़ के बोझ की वजह से अपनी जान दे रहे उसे देखकर लगता नहीं है कि हमारे देश के सिस्टम और राजनैतिक पार्टियों ने किसानों को कभी वोट बैंक से ज्यादा कुछ समझा है। जय हमारे देश की काफी दर्दनाक सच्चाई है।

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