भारत के इस शहर में लगा 100 साल का लॉकडाउन, आदेश जारी – जाने पूरी खबर।

100 saal ka lockdown

पूरे देश में कोरोना की दूसरी लहर हर इंसान को डरा रही हैं। और देखा जाए तो इस बार ये वायरस पिछली बार से भी ज्यादा खतरनाक हो कर आया हैं। विशेषज्ञों का माना जाए तो यह वायरस पहले से ज्यादा मजबूत हो कर आया हैं। जो की बहुत ही तेजी से बढ़ रहा हैं। यह वायरस पहले से ज्यादा खतरनाक हो गया है जिसकी वजह से इसका ईलाज थोड़ा मुश्किल हो गया है लेकिन स्वास्थ कर्मी पूरी मुस्तैदी से इसका सामना कर रहे हैं।

दूसरी तरफ देखा जाए तो कोरोना के बढ़ते मामलों ने जनता के साथ-साथ सरकार को भी डरा कर रखा हैं। और यही कारण है की सारे पैतरे अपनाने के बाद राज्य सरकारें धीरे-धीरे वापस लॉक डाउन की तरफ बढ़ रही हैं। और यही कारण है की मध्य प्रदेश के कई जिलों में नाईट कर्फ्यू लगाया जा चूका हैं और कही पर रविवार तो कहीं पर 3-3 दिन का लॉक डाउन लगा दिया गया हैं।

लेकिन वहीं मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में यह कोरोना बहुत तेज़ी से रफ्तार पकड़ रहा है और इस बीच यहां 100 साल का लॉक डाउन लगाने का आदेश चर्चा का विषय बन चूका हैं। जी हाँ, यह कोई मजाक नहीं है यह सच्ची घटना है जिसमे जबलपुर बरगी की नायब तहसीलदार द्वारा जारी किया गया हैं। और जिस पर खुद ने हस्ताक्षर भी किये है और हस्ताक्षर वाले आदेश पर 100 साल के लॉक डाउन के आदेश जारी हुए हैं।

आपको जानकार हैरानी होगी लेकिन तहसीलदार के आदेश पत्र में 3 अप्रैल 2021 से 19 अप्रैल 2121 तक के लॉक डाउन के आदेश हैं। जिस पर नायब तहसीलदार सुषमा धुर्वे ने सील सहित हस्ताक्षर भी किये हैं। जो की अब सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा हैं। जिसमे आप भी देख सकते है की कैसे 3 अप्रैल रात्रि 10:00 बजे से लॉक डाउन के प्रभावी होने की बात बोली गई हैं। जो की 19 अप्रैल 2121 से समस्त गतिविधियों को दोबारा संचालित करने का जिक्र हैं।

लेकिन आपको बता दे की यह सिर्फ एक टाइपिंग की गलती हैं ऐसा कुछ भी नहीं हैं। भारत के किसी भी शहर में 100 साल का लॉकडाउन नहीं लग रहा हैं। अगर आप जबलपुर जाना चाहते है तो जा सकते है लेकिन पूरी सेफ्टी के साथ और डरने की कोई बात नहीं हैं यह आदेश सिर्फ एक लिखने की गलती हैं। और यह बहुत बड़ी गलती है अगर देखा जाए तो और कोई कैसे अधिकारी किसी भी कागज पर बिना पढ़े सील हस्ताक्षर कर सकता है यह सोचने की बात है और यही कारण हैं की इसका सोशल मीडिया पर पुरजोर विरोध हो रहा हैं।

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