केजरीवाल जी आप सिर्फ विज्ञापन में व्यस्त रहिये, दिल्ली तो मोदी जी ही देख लेंगे।

Delhi Sarkar

देश में कोरोना जैसे कठिन समय में भी लगातार केंद्र और राज सरकारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर खत्म नहीं हो रहा हैं। आज के इस समय में देश ही की बात होना चाहिए उस समय में ऐसे आरोप-प्रत्यारोप लगता है सिर्फ भारत में ही सम्भव हैं। अभी के कठिन समय में भी दिल्ली सरकार के साथ ही साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री सिर्फ मोदी सरकार को ही कोसने में व्यस्त हैं। अब अगर देखे तो दिल्ली में किसी भी चीज़ की कमी हो तो केजरीवाल जी सिर्फ मोदी सरकार को ही जिम्मेदार ठहराती हैं। अगर हॉस्पिटल में ऑक्सीजन कम हुआ तो उसके लिए भी मोदी सरकार जिम्मेदार अगर वैक्सीन में कमी हुई तो भी मोदी सरकार जिम्मेदार।

Arvind Kejriwal

अब हालिया मामला ही ले लेते हैं। जो की वैक्सीन का हैं। जो की दिल्ली सरकार का वैक्सीन के लिए मोदी सरकार पर निशाना साधना उल्टा पड़ता दिख रहा हैं। वो इसलिए क्योकि बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक बयान जारी कर बताया है की दिल्ली सरकार ने 26 अप्रैल को 1 करोड़ 34 लाख वैक्सीन खरीदने की मंजूरी दी थी। तो फिर वैक्सीन पर सवाल क्यों? अब अगर केजरीवाल सरकार की निति को देखे तो कोरोना काल में भी दिल्ली की हिजाफत करने की जगह वह कहीं न कहीं राजनीती में व्यस्त दिख रहे हैं।

हम ऐसे ही नहीं बोल रहे की केजरीवाल सिर्फ राजनीती में लगे है इसके कई सारे उदहारण भी है। जब देश में वैक्सीन आई तो केजरीवाल सहित देश के कई विपक्षी दल वैक्सीन को “मोदी वैक्सीन” बता कर लोगो को भ्रमित कर रहे थे। और जब कुछ नतीजा नहीं मिला तो आज वैक्सीन को ले कर केंद्र पर ही आरोप लगा रहे है की वह वैक्सीन नहीं उपलब्ध करवा रही हैं। मतलब आपको भी हसी आ रही होगी की हमारे देश की राजनीती भी कैसी है। विरोध भी उसी का करना हैं जिसके सामने अपनी राजनीती को बचाने के लिए हाथ पसारना हैं।

Oxygen Cylinder

अब चलिए ऑक्सीजन पर भी दिल्ली सरकार की नियत साफ़ कर देते हैं। अब हम देखे तो दिल्ली सही हर राज्य में ऑक्सीजन की कमी है। और दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी होते ही वह मोदी मोदी चिल्लाने लगते है। और दूसरी तरफ उन्ही की पार्टी के नेता AAP के विधायक इमरान हुसैन करीब 650 ऑक्सीजन सिलेंडर घर में दबा कर बैठ जाते हैं। जिस पर हाई कोर्ट को भी पूछना पड़ता है की उनके पास इतना सिलेंडर कहा से आ गया, इसका जवाब दो? अब जब केंद्र सरकार की ओर से गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में ऑक्सीजन ऑडिट कराने की बात पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उठाते है तो उसमे भी दिल्ली सरकार विरोध करने लगती हैं। ऐसे में यह समझ ही आता की केजरीवाल जी कहीं न कहीं चित्त और पट्ट दोनों अपने पाले में ही देखना पसंद कर रही हैं। तो यह तो बिलकुल गलत है केंद्र के लिए देश के बाकी राज्य भी उतने ही बराबर है जितना की दिल्ली। अब यह बात केजरीवाल जी को समझना बहुत जरूरी हैं।

बात यहीं खत्म नहीं होती है सोचिये जब केंद्र सरकार महाराष्ट्र सरकार को उनकी जरुरत के हिसाब से ऑक्सीजन मुहैया करवा रही है तो फिर दिल्ली सरकार को क्यों नहीं करवाएगी? यह एक बहुत बड़ा सवाल हैं। यह बात हम नहीं खुद बीएमसी कमिश्नर इक़बाल सिंह चहल ने कहा है वो भी इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए इंटरव्यू में। बीएमसी कमिश्नर इक़बाल सिंह चहल ने कहा की जिस समय हर राज्य हमारे ऊपर हस रहे थे की इस राज्य में इतने केस कैसे? उस समय केंद्र ने हमे जितनी जरुरत थी उतनी ऑक्सीजन की सप्लाई दी।

अब आप भी सोचिये की जिस राज्य में सबसे ज्यादा कोरोना के केस है ऑक्सीजन की जरुरत भी सबसे ज्यादा वहीँ होना चाहिए लेकिन नहीं दिल्ली में ऑक्सीजन की सबसे ज्यादा मांग है। ऐसा क्यों? अब या तो दिल्ली सरकार कोरोना के मामले को छुपा रही हैं या फिर कोई और बात हैं जो सिर्फ केजरीवाल ही जानते हों? लेकिन इस बात की फ़िक्र केजरीवाल जी को कहा है वह तो सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस में 1 करोड़ 34 लाख वैक्सीन को खरीदने की मंजूरी देते हैं और इसके अलावा मोदी सरकार पर आरोप लगाते है। तो केजरीवाल जी आप कोरोना काल के इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी को समझों न की आरोप प्रत्यारोप में लगे रहें। और देखा जाए तो स्वास्थ्य राज्य का विषय है और केंद्र के लिए सिर्फ आपका ही एक राज्य नहीं है बाकि दूसरे राज्य भी है। जिन्हें भी कोरोना से बचाना हैं।

Sambit Patra

अगर संबित पात्रा की माने तो दिल्ली में 45 वर्ष से ऊपर के लोगों में सिर्फ 8.93 फीसदी लोगों को ही वैक्सीन की दोनों डोज मिली हैं। वहीं अगर 60 से अधिक आयु वाले लोगों को देखे तो सिर्फ 48.03 फीसदी लोगों को ही वैक्सीन की पहली डोज लगी हैं। इसलिए मुख्यमंत्री जी आप और आपके मंत्री वैक्सीन और ऑक्सीजन को लेकर केंद्र को कोसने की जगह अपने कार्य करने की प्रणाली पर ध्यान दे और उसे सुधारे तो यह दिल्ली के लिए अच्छा होगा।

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