आपने कभी सोचा है कि छींक आने से आँखें बंद क्यों हो जाती हैं? – जाने इसके पीछे का पूरा राज़।

Chhik Aane par aankhen bnd kyo hoti hai

आपने देखा होगा की बच्चा हो या बड़ा जब भी उसे छींक आती है तो उसकी एक दम से आँखें बंद हो जाती हैं या फिर पालक झपक जाती हैं। वैसे तो यह साधारण बात है क्योकि जब हमे सर्दी या झुकाम होता है तो छींक आना शुरू हो जाती है जिससे हर कोई समझ जाता है की अब सर्दी – झुकाम होने वाला है और हर कोई सतर्क हो जाता हैं। लेकिन इसी बीच आपने एक चीज़ देखी होगी। जब भी हम छीकते है तो हमारी आँखें बंद हो जाती हैं। लेकिन अभी सवाल ये है की ऐसा क्यों होता हैं।

यह कारण है आँखों के बंद होने का

भारत में अगर देखा जाए तो हमारे बड़े – बुजुर्ग हर बात का अपना एक अलग ही नजरिया रखते है जो कभी – कभी सच भी साबित हो जाता हैं। ऐसा ही कुछ तजुर्बा छींक के लिए भी हमारे बड़े बुजुर्ग का था। वो कहते थे की अगर छींक आते समय हमने आँखें बंद नहीं की तो हमारी आँखों की पुतली बहार आ जाएगी। यह सुन कर आपको हसी आ रही होगी लेकिन ये हमारे बुजुर्गों का तजुर्बा हैं। लेकिन छींक तो एक हमारे शरीर की ऐसी प्रक्रिया है जिसके कारण हमारे शरीर के नाक व गले के अंदर के उत्तेजक पदार्थों को बहार निकाला जाता हैं।

आपको बता दे की छींक आने से मुंह से तेजी से हवा बहार निकलती हैं। जो की पूरी तरह से अनैच्छिक होती है। ये तो आप सब जानते है की छींक अचानक से आने वाली प्रक्रिया है जो की बिना किसी चेतावनी के आती हैं। और अगर छींक ज्यादा आती है तो फिर यह सर्दी – झुकाम या किसी एलर्जी के संकेत देती हैं।

नहीं रहता शरीर काबू में।

विशेषज्ञों की माने तो छींक शरीर की एक ऐसी प्रक्रिया है जो बिना किसी चेतावनी के आती है और ना ही कुछ इसके आने से शरीर पर काबू रहता हैं। और यही कारण है की हम चाह कर भी छींक के दौरान हमारी आँखें खुली नहीं रख पाते हैं। आपकी जानकारी के लिए आपको बता देते है की छींक की रफ़्तार 100 मिली प्रतिघंटा होती हैं। जिसके साथ ही लगभग 100000 जर्म की वातावरण में मुक्ति होती हैं। अगर आपको भी छींक आती है तो आप इससे परेशान मत होना यह तो आपके शरीर के लिए एक हद तक अच्छी मानी जाती हैं।

नोट : देखा जाए तो छींक से शरीर के हानिकारक जर्म शरीर से बहार निकलते है इसलिए सेहतमंद जीवन के लिए छींक बेहद जरुरी होता हैं।

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