कोरोना वैक्सीन लगने के बाद कितने दिन कोरोना से बचा जा सकता हैं? – जाने पूरी सच्चाई

Corona Vaccine

जिस तरह से कोरोना वायरस की दूसरी लहर देश में तेज़ी से फेल रही हैं और लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। जिससे कई लोगों की जान भी जा रही हैं। इन्ही सब को देखते हुए देश में कोरोना वैक्सीनेशन (Corona Vaccination) का कार्य भी तेज़ी से किया जा रहा हैं। और 45 साल से अधिक की उम्र के बाद अब सरकार ने घोषणा की है कि 1 मई से 18 साल से ऊपर कि आयु वाले हर व्यक्ति को कोरोना का टिका लगाया जाएगा। लेकिन लोगों के मन में एक सवाल बहुत घूम रहा हैं कि क्या वैक्सीन लगवाने के बाद कोरोना नहीं होगा या वैक्सीन लगवाने के बाद कोरोना कितने दिनों तक नहीं होगा। तो चलिए हम एक्सपर्ट से इस बात पर जवाब लेते हैं।

अगर हम एक्सपर्ट कि माने तो कोरोना वायरस से बचने का सबसे अच्छा कोई ऑप्शन है तो वह है वैक्सीन। वो इसलिए क्योकि यह वैक्सीन आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है ताकि आपके बीमार होने के चांस कम हो सके। लेकिन यह बात हम सब जानते है कि कोई भी वैक्सीन का असर जिंदगी भर नहीं होता है एक निश्चित समय कि अवधि तक ही होता है। इस पर एक्सपर्ट ने बताया कि कोरोना वैक्सीन का असर कितने समय तक रहेगा।

अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Disease Control and Prevention) ने कोरोना वैक्सीन पर एक शोध किया जिसमे उन्होंने 4000 स्वस्थकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स पर आफ्टर वैक्सीनेशन किया। जिसमे देखा गया कि फाइजर-बायोएनटेक (Pfizer-BioNTech) कि वैक्सीन ६ महीने तक कारगर रहती हैं। जिसके बाद यह वैक्सीन आपको शायद ही कोरोना से बचा पाए। इसके अलावा कुछ और दूसरी वैक्सीन 6 महीने से साल भर तक भी आपको कोरोना से बचा सकती हैं।

वहीं अगर देखा जाए तो मॉडर्ना वैक्सीन (Moderna) की दोनों डोज़ लेने के बाद यह 6 महीने तक कारगर रहती हैं। क्योकि मॉडर्ना वैक्सीन से तैयार की गई एंटीबॉडीज 6 महीने तक आपकी बॉडी में रहती हैं। लेकिन किसी व्यत्कि का बीमार होना उसकी एंटी बॉडीज पर भी निर्भर करता है। क्योकि जितनी आपकी इम्युनिटी मजबूत होगी कोरोना का खतरा उतना ही आपके लिए कम होगा।

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैक्सीन एक्सपर्ट की माने तो उनका कहना है की वर्तमान में जितनी भी वैक्सीन मौजूद है उनका असर कम से कम एक साल तक ही रहता हैं। इसलिए अगर भविष्य में फिर से कोरोना के नए वैरिएंट्स आते है तो ये बहुत बड़ा चिंता का विषय बन सकता हैं। क्योकि वायरस के म्युटेंट बदलते है तो हमें वैक्सीन में भी फिर से अपडेट करना होता है।

नोट : एक जरुरी बात आपको बताते चले की इम्यून सिस्टम मजबूत होना चाहिए लेकिन उसे इतना भी ज्यादा मजबूत बनाने की कोशिश न करें की वह आपके लिए नुकसानदायक बन जाए। क्योकि इसके कारण इम्यून सिस्टम बीमारी से लड़के की बजाय हमारे शरीर को ही डैमेज कर देता हैं। जिसे साइटोकाइन स्टॉर्म कहा जाता हैं। जिसमे इम्यून सेल फेफड़ों के नजदीक एकत्र हो कर उस पर हमला बोल देते हैं। इसमें खून की नशे भी फट सकती हैं। ऐसे अगर देखा जाए तो जांच और इलाज से इसको कंट्रोल किया जा सकता है लेकिन covid19 मरीजों के केस में अभी कुछ भी नहीं बोल सकते हैं।

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