पति पत्नी की जोड़ी ने बिना हॉस्पिटल जाए 2 बार हरा दिया कोरोना को – बताया बस इन बातों का रखे ध्यान।

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कोरोना की दूसरी लहर ने ऐसा डर का माहौल बना दिया है की अगर किसी को कोरोना हो जाए तो वह आधा बीमार तो डर से ही हो जाए। जो की उसे बिलकुल नहीं होना चाहिए। क्योकि कोई भी बीमारी शरीर पर जब तक हावि नहीं होती तब तक की इंसान उससे डरने न लगे। अब अगर ऐसे में हम डर जाएंगे तो बीमारी को हराना मुश्किल हो जाएगा। इस कोरोना महामारी में हर किसी के लिए पॉजिटिव होना काफी जरुरी हैं। ऐसे में आज हम आपको दिल्ली के एक कपल की कहानी बताने वाले है जिसने घर में रह कर ही दो बार कोरोना को हरा दिया।

जिस दिल्ली के कपल की हम बात कर रहे है उन्होंने कोरोना की दोनों लहर को बड़े ही करीब से देखा है और पहली लहर में भी कोरोना को हराया है और दूसरी लहर में भी कोरोना को हरा चुके हैं। जिसके बारे में हम आपसे बात कर रहे है उनका नाम तरुण राजपूत और गौरांशी श्रीवास्तव हैं। दोनों दिल्ली के प्रीत विहार के रहने वाले हैं। आपको बता दे की इन्हें पहली बार कोरोना नवंबर में हुआ था। जिसके बाद इन्हें कोरोना की दूसरी लहर में फिर से अप्रैल में हुआ था और ये दोनों बार कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भी हॉस्पिटल में एडमिट नहीं हुए।

इस तरह दो बार घर पर ही जीती कोरोना से जंग।

तरुण से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया की जब हमे दूसरी बार कोरोना हुआ तो हमे कोरोना के नए लक्षण देखने को मिले। पिछली बार हमे स्वाद नहीं आया था और दुर्गन्ध नहीं आई थी लेकिन इस बार हमे सिर्फ हल्का बुखार हुआ था। लेकिन हमने दोनों बार हिम्मत नहीं हारी और बिना घबराए बिना किसी टेंशन के शांत मन से रहे और पुरे समय पॉजिटिव बने रहे। क्योकि पॉजिटिव होने के कारण ही कोरोना हम पर हावि नहीं हो पाया।

इसके साथ ही तरुण ने बताया की हमने पॉजिटिव रहते हुए अपनी डाइट का खासा ध्यान रखा। हमने दिन में दो तीन बार निम्बू पानी पिया। और गर्म पानी का उपयोग किया। ठंडा पानी पीना बिलकुल बंद कर दिया था। इसके साथ ही इलायची, काली मिर्च, सोंठ, लौंग और गुड का काढ़ा दिन में 2 बार लेते थे।

तरुण की पत्नी गौरांशी श्रीवास्तव ने बताया की हम शुरुआत में सिर्फ हल्का फुल्का खाना लेते थे जैसे की हल्का खाना जैसे दलिया, जूस इस प्रकार से। और फिर धीरे धीरे हमने अपनी डाइट को बढ़ते हुए नार्मल खाना शुरू कर दिया। हम भोजन करने के लिए डिस्पोजल वाली प्लेट का ही उपयोग करते थे जिसे बाद में फेक देते थे। ताकि हमारे द्वारा हाथ लगाई हुई थाली को कोई और न हाथ लगाए। इसके साथ ही हम दिन में दो तीन बार भाप लेते थे। और फिर हम धीरे धीरे रिकवर होने लगे।

तरुण ने बताया की हमारी इच्छा शक्ति ही हमारी सबसे अच्छी दवाई हैं। हमने हिम्मत नहीं हारी जिससे की हमारी इम्युनिटी बढ़ती चली गई। तरुण ने सभी के लिए कहा की अगर आप भी कोरोना पॉजिटिव होते है तो आपको डरना नहीं है बल्कि इसका डट कर सामना करना हैं। और हमने कोरोना पॉजिटिव के दौरान कभी भी कोरोना की नेगेटिव न्यूज़ नहीं देखी जिससे की हमारा मनोबल कम हो। हम पुरे समय मूवीज और वेब सीरीज देखा करते थे।

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