अगर आप भी करते है खाना बनाने से लेकर खाने तक ये गलतियाँ तो इनसे बचे – दुर्भाग्य रहेगा दूर, बरसेगी माँ लक्ष्मी की कृपा।

rasoi ghr me ye glti kbhi na kare

आपने अक्सर अपने परिवार में या फिर अपने आसपास देखा होगा की हस्ता खेलता परिवार, खुशहाल जीवन जीने वाला परिवार एक दम से परेशानियों का घर बन जाता है। ऐसा देख कर समझ नहीं आता है की ऐसा क्या हुआ जो खुशहाल परिवार परेशानियों का घर बन गया। लेकिन हमे समझ नहीं आता है परन्तु हमारे वास्तु शास्त्र में हमारी सुख – दुःख से संबंधित सारी बातों का उल्लेख किया गया हैं।

आप सुन कर चौक गए होंगे लेकिन वास्तु शास्त्र में घर के हर सुख – दुःख के बारे में बताया गया हैं। हमें अपनी जिंदगी ख़ुशी से बिताने के लिए, स्वस्थ रहने के लिए, रोजमर्रा की जिंदगी में क्या – क्या ध्यान रखना चाहिए इन सब बातों में वास्तु शास्त्र में पूरा बताया गया हैं। और हर परेशानी का उपाय भी वास्तु शास्त्र में दिया हुआ हैं।

वास्तु शास्त्र में यहां तक बताया गया है की खाना बनाने से लेकर खाना खाने तक जो भी गलतियां होती है उसके कारण से धन की देवी माँ लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। जिसकी वजह से आर्थिक स्थिति भी ख़राब हो जाती हैं। तो चलिए जानते है वास्तु शास्त्र के अनुसार किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

रसोई घर से जुड़े वास्तु शास्त्र के कुछ नियम

ध्यान रहे की उत्तर -पूर्व दिशा में कभी भी किचन नहीं बनवाना चाहिए। किचन हमेशा दक्षिण – पूर्व दिशा में बनवाए। जिसे आग्रेय कोण कहते हैं। अगर इस दिशा में किचन होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता हैं।

वास्तु शास्त्र की माने तो खाना बनाने की सबसे शुभ दिशा पूर्व दिशा है। इसलिए आपको अपना मुंह पूर्व दिशा की तरफ करके खाना बनाना चाहिए। इस दिशा में पका हुआ भोजन पूरे परिवार के लिए अच्छी सेहत और उस सौभाग्य लेकर आता है।

अगर आप भी खाना बनाने के बाद चूल्हा गंदा ही छोड़ देते है तो ऐसा बिलकुल न करे। खाना बनाने के बाद चूल्हे को साफ़ कर दे। क्योंकि चूल्हा धन और समृद्धि का प्रतीक होता है। और अगर वही गंदा होगा तो धन और समृद्धि कैसे मिलेगी।

भोजन करते समय कभी नहीं करनी चाहिए यह गलतियां

वास्तु शास्त्र की माने तो भोजन हमेशा पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके ही करना चाहिए वो इसलिए, क्योंकि पूर्व दिशा को देवताओं की दिशा माना गया है इसलिए इस दिशा में मुंह करके भोजन करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इसके साथ ही उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके भोजन करने से स्वास्थ्य संबंधित बीमारियां नहीं होती है।

आपने सुना होगा घर – परिवार में बड़े – बूढ़े लोग हमेशा यही कहते है की भोजन स्नान करने के बाद करना चाहिए ठीक यही शास्त्रों में भी बताया गया है की भोजन स्नान करने के पश्चात ही करना चाहिए। क्योंकि भोजन को अन्नपूर्णा माना जाता है। अगर आप हाथ – पैर – मुंह धोकर भोजन करते है तो इससे आपकी आयु में भी वृद्धि होगी।

कहीं आप भी तो टूटे हुए बर्तन को किचन में नहीं रखते। अगर रखते है तो आज से रखना बंद कर दे। क्योकि वास्तु शास्त्र में बताया गया है की किचन में काम करते वक्त जाने अनजाने में कोई बर्तन टूट जाए तो उसे तुरंत ही बाहर फेंक देना चाहिए क्योंकि टूटे-फूटे बर्तनों में भोजन करने से जीवन में दुर्भाग्य आने की संभावना अधिक बड़ जाती है।

हम बचपन से एक बात सुनते आ रहे है जब भी कोई बच्चा खाना खाने बैठता है तो हर कोई यही बोलता है की जितना खाए उतना ही प्लेट में लेना या देना। यह बात हमें बचपन से सिखाई जाती हैं और यही बात वास्तु शास्त्र में भी लिखी है की अपनी प्लेट में उतना ही भोजन लेना चाहिए जितना आपको भूख हो। अगर आप प्लेट में अधिक भोजन लेकर डस्टबिन में फेंक देते हैं तो इसकी वजह से भोजन का अपमान होता है। और भोजन में माँ अन्नपूर्णा का वास होता है।

अगर आप भी ग़ुस्से में भोजन करते है तो ऐसा करना छोड़ दीजिये। इंसान को कभी भी ग़ुस्से में भोजन करना चाहिए और न ही ग़ुस्से में भोजन छोड़ना चाहिए। क्योकि भोजन में अन्नपूर्णा माता का वास होता है।

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