कल्याण सिंह के देहांत के बाद अयोध्या के संत भी हुए दुखी, क्यों कहा की अगर वो नहीं होते तो राम मंदिर एक सपना होता…

Kalyan Singh Ji

आज उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह हमारे बिच नहीं रहे है, यह जाने माने राजनेता रहे है जिन्होंने राम मंदिर में अहम् भूमिका निभाई थी। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह राम मंदिर आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाने वाले नेता रहे है।  इनका शनिवार देर शाम लखनऊ के SGPGI अस्पताल में निधन हो गया।

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इन्हे आज उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों के आलावा अयोध्या का संत समाज में भी शोक की लहर है। संतो का कहना है की, पूर्व सीएम के जाने के साथ ही राम मंदिर आंदोलन का एक अध्याय समाप्त हो गया। अयोध्या के संतों का कहना है कि 6 दिसंबर 1992 को जब विवादित ढांचा गिराया गया था, उस समय कल्याण सिंह अगर मुख्यमंत्री न होते तो राम मंदिर नहीं बन सकता था।

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कल्याण सिंह के निधन पर आज पूरा देश शोक व्यक्त कर रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा, ‘राम मंदिर आंदोलन के अगुआ चले गए। यह हम सभी के लिए दुख का दिन है, राम जन्मभूमि पर राम मंदिर बन पाता, इससे पहले ही कल्याण सिंह स्वर्ग सिधार गए।

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पूर्व सीएम के निधन पर कहा है कि 6 दिसंबर 1992 में जो हुआ उसकी पूरी जिम्मेदारी कल्याण सिंह ने ली थी। उन्होंने बताया की 6 दिसंबर को आयोध्या में हुई हर घटना की जिम्मेदारी लेने का साहस उनमे था। इसके साथ ही निर्मोही अखाड़ा के प्रमुख महंत धीनेंद्र दास ने कल्याण सिंह के निधन पर शोक जताते हुए कहा है कि, कल्याण सिंह के निधन के साथ राम मंदिर आंदोलन का एक जरूरी अध्याय समाप्त हो गया है। इनकी कमी हमेशा सभी के दिल में रहेगी। 

महंत कमल नयन दास ने कहा कि, “कल्याण सिंह ने ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता तैयार किया है, उनकी इसमें अहम् भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा की यदि वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं होते तो राम मंदिर आज भी दूर का सपना होता।” अलीगढ़ में सोमवार को पूर्व सीएम का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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