किसान आंदोलन ने कांग्रेस को दिया इस राज्य में पैर जमाने का मौका

Congress in UP

उत्तरप्रदेश के एक हिस्से में चल रहे किसान आंदोलन ने कांग्रेस पार्टी को आशा की एक उम्मीद दी है जिसका पूरा फायदा उठाते हुए कांग्रेस पार्टी उत्तरप्रदेश में एक बार फिर से अपना भाग्य उदय करना चाहती हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां कांग्रेस पार्टी लगातार तीन चुनावों में मतदाताओं को लुभाने में असफल रही हैं।

‘जय जवान-जय किसान’ के नारे से एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी ने अभियान शुरू किया हैं। जिसके लिए कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने हाल ही में तीन किसान सभाओं को संबोधित किया है। जो की रामपुर, सहारनपुर और बिजनौर में थी। बताया जा रहा है की वह इस सप्ताह के अंत में मथुरा और मुजफ्फरनगर में दो और ‘किसान पंचायतों’ को संबोधित करेगी।

बता दे की यूपी विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है, क्योकि उत्तरप्रदेश में जनवरी 2022 में चुनाव होना हैं। जिसका कांग्रेस पूरा फायदा लेना चाहती हैं और कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है जाट और गूजर मतदाताओं के बीच भाजपा के वर्चस्व और अल्पसंख्यकों के बीच सपा-बसपा के गढ़ को तोड़ने की।

किसान आंदोलन के चलते हो रहे प्रदर्शनों ने कांग्रेस को एक अच्छा मौका दिया हैं जिसे वह भूल से भी हाथ से नहीं जाने दे सकती और इसी अवसर का लाभ उठाते हुए प्रियंका गांधी ने दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे तीन महीने से किसान आंदोलन का विरोध कर रहे नाराज किसानों को लुभाने के लिए पश्चिमी यूपी में ‘जय-जवान, जय-किसान’ अभियान की शुरुआत की है।

प्रियंका गांधी ने गणतंत्र दिवस पर किसान यूनियनों द्वारा आयोजित ट्रैक्टर मार्च के दौरान दिल्ली में एक दुर्घटना में मारे गए एक सिख किसान को सम्मान देने के लिए एक समारोह में भाग लेकर रामपुर में अपने अभियान की शुरुआत की।

19 फरवरी को मथुरा में और 20 फरवरी को मुजफ्फरनगर में किसानों के साथ ऐसी ही बैठकें उनकी अगली मंजिलें हैं।

कांग्रेस के सूत्रों ने इंडिया टुडे टीवी को बताया कि किसानों के आंदोलन ने 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद हुए “जाटों और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक विभाजन को तेज कर दिया था। ”

प्रियंका गंधी को किसानों के आंदोलन के चलते भाजपा विरोधी भावनाओं पर जोर देते हुए, पश्चिमी यूपी में कांग्रेस को मजबूत बनाने की उम्मीद है।

यूपी के एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा, “किसान पंचायतें पार्टी के कैडर को मजबूत बनाने में मदद कर रही हैं और साथ ही पार्टी को राज्य की राजनीति के केंद्र में वापस लाने में मदद कर रही हैं।”

चूंकि समुदाय को लुभाने के लिए पार्टी के पास इस क्षेत्र में एक पहचान योग्य जाट चेहरे का अभाव है, इसलिए यह अल्पसंख्यकों और अन्य कृषि समुदायों के विश्वास को वापस जीतने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

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