अब ‘माँ का दूध’ बाजार में मिलेगा, कैसा होगा यह दूध, और कितने समय में होगा तैयार।

Maa Ka Dudh

नवजात बच्चों के लिए मां का दूध (Breast Milk Benefits) सबसे बेहतर माना जाता है, लेकिन कई बार यह समस्या अति है, की किसी को दूध नहीं आता है। इस परिस्थिति से निपटने के लिए एक कम्पनी द्वारा बच्चो के लिए ‘मां का दूध’ तयार किया जा रहा है। यह नवजात बच्चों को आसानी से दिया जा सकता है। इससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर तरीके से होता है। आइये देखते है, यह दूध कैसा है।

Breast Milk

हमेशा कोशिश की जाती है कि हर बच्चे को उसकी मां का दूध जरूर मिले, लेकिन यदि वह उपलब्ध नहीं हो पाता है, इसके लिए लैब में ब्रेस्ट मिल्क बनाया जा रहा है। बायो मिल्क (Biomilk) नाम की एक स्टार्टअप कंपनी ने इसके लिए कार्य शुरू किया है। ब्रेस्ट मिल्क का मतलब यह है, की इसमें माँ से मिलने वाले दूध की तरह इस दूध को बनाया जाएगा। इसके लिए लगभग 3 साल का समय लगेगा, लेकिन यह दूध बच्चों के लिए काफी हद तक ब्रेस्ट मिल्क जैसा ही रहेगा।

लैब में तैयार होगा ब्रेस्ट मिल्क

Bio milk

आज वर्तमान में टेक्नोलॉजी का इतना विकास हो गया है, की अब माँ के दूध को भी भी लैब में बनाने की तैयारी चल रही है। तैयार करने की प्लानिंग चल रही है. इसके लिए प्लानिंग शुरू हो गयी है। बायोमिल्क (Biomilk) नाम की एक कम्पनी द्वारा स्टार्टअप (Start Up Company) ने महिलाओं की स्तन कोशिकाओं (Breastfeeding Mother) से दूध को तैयार करने में सफलता प्राप्त की है। यह उसी तरह का दूध निर्माण कर रही है, जैसा की माँ का दूध होता है। इसके साथ ही कंपनी में काम करने वाले ज्यादातर महिलाएं ही है।

मां के दूध की तरह पौष्टिक होगा, यह लैब मिल्क

Bio milk

इस स्टार्ट-अप कंपनी (Start Up Company) का कहना है, की दूध में काफी हद तक वे सभी पौष्टिक तत्व मौजूद हैं, जो पूरी तरह से ब्रेस्ट मिल्क की तरह ही है। इसकी मैक्रोन्यूट्रिएंट प्रोफाइल के हिसाब से देखा जाए तो इसमें उन सभी प्रकार के फैटी एसिड्स और बायोएक्टिव लिपिड्स, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट,(Bioactive Lipids) मौजूद हैं, जो मां के दूध में होते हैं। इस दूध का उपयोग बच्चे को पूरी तरह से स्वस्थ रखने के लिए किया जा सकता है।

मार्केट में कब से उपलब्ध होगा

कंपनी के की डॉक्टर लीला स्ट्रिकलैंड ने फोर्ब्स के साथ बातचीत में कहा कि, यह दूध अभी अभी ट्रायल स्टेज पर है, और इसे आने में लगभग 3 साल का समय लग सकता है। पूरी तरह से जांच के बाद ही इसे मार्किट में लाया जायेगा।

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