मां की तेरहवीं पर बेटे ने मृत्युभोज करवाने की जगह स्कूल बनाने के लिए दिए 10 लाख, समाज में दिया नया सन्देश।

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इंसान की मृत्योपरांत भोजन कराना हमारे धर्म ओर संस्कृति का एक हिस्सा माना जाता है। हमारे धार्मिक ग्रन्थ जैसे गरुड़ पुराण, पितृ संहिता, वेदों में अनेकानेक जगह इसका वर्णन मिलता है,जिसके लिए आज समझ में सभी जगह मृत्यु के बाद मृत्युभोज दिया जाता है। लेकिन एक लड़के ने मृत्युभोज की जगह पर स्कूल के लिए 10 लाख रूपए दान दिया किया है। आइये जानते है, कौन है यह लड़का।

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यह लकड़ा बिहार के बेगूसराय के मोहनपुर गांव में रहता है। इसका नाम राजकिशोर सिंह है, जिसने समाज के लिए एक नई मिसाल पेश की है, उन्होंने अपनी मां के निधन के बाद गांव वालो को दिए जाने वाले मृत्युभोज (तेरहवीं) की जगह पर उन्होंने अपने गांव में जर्जर हो चुके हाईस्कूल की बिल्डिंग को बनवाने के लिए 10 लाख रुपये दे दिए, यह स्कूल काफी खस्ताहाल हो चूका था।

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उन्होंने बताया की कई अधिकृत लोग अपने पैसे को मृत्युभोज में खर्च करते है। लेकिन उस पैसे को समाज के कार्यो में भी लगाया जा सकता है। आज उनके द्वारा खर्च की जाने वाली राशि को समाज के विकास में खर्च करने के फैसले की हर तरफ तारीफ हो रही है। उन्होंने समाजिक की इस परम्परा को तोड़ते हुए एक दिशा दिखाई है।

माँ की मृत्यु के बाद लिया निर्णय

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राजकिशोर सिंह की 85 साल की मां जानकी देवी का निधन हो गया था, उसकेबाद उनके गाँव में मृ्त्युभोज कराने की परंपरा है, जो 13 दिनों के बाद होती है। लेकिन उनके दिमाग में गांव के स्कूल की बिल्डिंग का जिर्णाद्धार कराने का विचार आ रहा था, उन्होंने गांव के लोगों की बैठक बुलाई और बताया कि वह मृत्युभोज छोटा रखना चाहते हैं और बदले में इसकी जगह स्कूल के लिए पैसे देने चाहते हैं। इस फैसले की गांव के सभी लोगों ने तारीफ की और उनके इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। माँ की मृत्यु के बाद लिया निर्णय।

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