आखिर क्यों श्री कृष्णा ने लड़की बनकर की थी इरावन से शादी – कौन थी इरावन?

Iraavan Krishna Story

महाभारत के बारे में हमने पढ़ा और सुना है। यह हिन्दुओं का एक प्रमुख काव्य ग्रंथ है, इतना ही नहीं महाभारत को जीवन का सार भी कहा जाता है। इसमें बताई गयी कई बातो को जीवन में उतारा जाता है। महाभारत में आपको धर्म से लेकर राजनीति तक सभी बातो का ज्ञान मिलता है। आध्यात्मिक दृष्टी से भी यह ग्रंथ काफी परिपूर्ण है। आज हम आपको इसके एक पात्र इरावन के बारे कुछ बतायेगे जो अपने शायद कभी नहीं सुना हो।

इरावन का जन्म कैसे हुआ था।

Iravan

अर्जुन ने महाभारत में कई विवाह किये थे, जिसमे से उनकी एक पत्नी नागकन्या थी। इरावन अर्जुन और नागकन्या उलूपी के पुत्र थे। उलूपी का अर्जुन से विवाह वनवास के दौरान हुआ था। विवाह के बाद उनका एक पुत्र हुआ जिसक नाम इरावन था। महाभारत कथा के मुताबिक इरावन पांडवों की तरफ से लड़े और कौरव पक्ष के योद्धाओं अवंती राजकुमार विंद, अनुविंद, शकुनि के भाइयों गज, गवाक्ष, ऋषभ, आर्जव, शुक्र, चर्मवान, दुयोधन के साले सुदक्षिण, भूरिश्रवा के चार पुत्रों को उन्होंने अकेले मृत्यु के घाट उतारा था।

खुद की बलि देना चाहते थे।

Iravan

युद्ध के आठवे दिन कौरवों की ओर से लड़ रहे राक्षस अम्बलुष ने इरावन को मारा था, कहा जाता है, की वह पांडवो को जित दिलाने के लिए देवी चामुण्डा को खुद की बलि देना चाहते थे। लेकिन ऐसा पांडवो ने उन्हें नहीं करने दिया था। इरावन की इस बात पर श्रीकृष्ण ने भी पांडवों को समझाया था कि, इरावन का बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा हमारे ऊपर देवी चामुण्डा का आशीर्वाद मिलने से विजय अवश्य प्राप्त होगी।

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महाभारत के महान योद्धा और अर्जुन पुत्र इरावन का भी जिक्र मिलता है, युद्ध के दौरान उन्होंने नृशंसता से कौरवों का नाश किया था। मगर धार्मिक ज्ञान में ज्यादा झुके होने के कारण वह कभी भी अविवाहित नहीं मरना चाहते थे, इसी दौरान उन्होंने युद्ध के समय विवाह करने की जिद पकड़ लीम ऐसे में खुद भगवान श्री कृष्ण ने मोहिनी का रूप लेकर इरावन से विवाह किया था। विवाह करने के बाद वह दोबारा युद्ध में लोट गए और युद्ध में आठवें दिन इरावन वीरगति को प्राप्त हुए थे, जिसके बाद कृष्ण खुद को विधवा मानकर विलाप करते रहे थे।

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