समीक्षा गनेड़ीवाल ने दिया प्लास्टिक बोतल का विकल्प – मात्र 19 रु. में ‘कागज़ी बोतल’ बनाकर दुनिया को प्लास्टिक मुक्त बनाने का प्रयास।

kagazi bottles

आज सभी पर्यावरण को बचाने के लिए प्लास्टिक का उपयोग कम से कम कर रहे है। लेकिन हम आज सभी जगह इसका उपयोग करते है। हम सिंगल यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद भी कर दें, तो भी किसी न किसी रूप में हम प्लास्टिक लेते है। आज सामान्य रूप से हम सभी पानी के लिए प्लास्टिक बॉटल का उपयोग करते है। इसलिए समीक्षा गनेड़ीवाल ने कागल बॉटल का निर्माण किया है जो हमे प्लास्टिक की बॉटल के रूप में विकल्प प्रदान करता है।

इस तरह से आया आईडिया

Kagazi Bottles

उनको यह आईडिया कॉलेज प्रोजेक्ट करते हुए आया उन्होंने बातचीत में बताया की कॉलेज के दिनों में वे प्लास्टिक बैग्स को रिप्लेस करने के प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी। इसके साथ ही वह स्वयं भी प्लास्टिक को कम करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उन्हें कोई दूसरा विकल्प नहीं मिल रहा था। उन्होंने इसी दौरान प्लास्टिक का विकल्प ढूंढने पर काम शुरू किया।

2016 में खड़ी की अपनी कंपनी

samiksha ganedi

समीक्षा ने MBA किया है, इसके बाद उन्होंने हैदराबाद, नोएडा के कई MNCs में नौकरी की, 2016 में समीक्षा ने पैकेजिंग सॉल्यूशन्स की अपनी कंपनी खड़ी की और प्लास्टिक बोतल का विकल्प ढूंढना शुरू किया। इसके लिए उन्होंने कागज की बोतल बनाने पर काम शुरू किया। समीक्षा को प्लास्टिक का विकल्प ढूंढने में रूचि तो थी लेकिन इस फ़ील्ड से जुड़ी ज़्यादा जानकारी नहीं थी। इसके लिए उन्होंने वैज्ञानिकों, प्रोडक्ट डिज़ाइनर्स से मदद ली।

काम करने के दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसके लिए सही मशीनरी ढूंढना. मार्केट जाना और मशीन ख़रीद कर लाना। परिस्थिति में ऐसा कुछ संभव नहीं था। हमें मशीन बनानी पड़ी। प्रोजेक्ट में मदद करने वाले सही लोग ढूंढने पड़े।”

Kagazi Bottles

इसके साथ ही लोगो को ट्रांसपेरेंट बोतल की आदत थी जिसके लिए उन्हें इस तरह का कोई आईडिया लाना था। लोगों के बीच Kagazi Bottles को पॉपुलर बनाना भी कड़ी चुनौती थी। धीरे धीरे उन्होंने भूरे रंग की पानी की बोतल को लोगो को दिखाया जिसे लोग पसदं करने लगे। इस तरह से अब उनकी प्लास्टिक की जगह कागज की बॉटल इस्तेमाल की जाती है। इसका प्राइस भी ज्यादा नहीं है उन्होंने इसका प्राइस मात्र 19 रूपए बताया है।

इस बॉटल का रंग भूरा है। यह बायोडिग्रेडेबल बोतल भारत में बनाई थी और वो इसका नाम देसी ही रखना चाहती थी। इसलिए इसका नाम ‘Kagzi Bottles’ रख दिया। इसके लिए हिमाचल प्रदेश की एक कंपनी उन्हें कागज़ देती है। इसको बनाने में 2 दिन का समय लगता है। इनकी कंपनी हर महीने 22 लाख बोतल बनाती है।

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