जाने कैसे यह महिला बिना स्कूल गए, बिना पढाई किये कमाती हैं महीने का 3.5 लाख रूपए।

नवलबेन दलसंगभाई चौधरी

आपने बहुत से लोगो को यह कहते हुए सुना होगा की मेरे लिए यह काम नहीं बना है। या फिर मै इस काम के लिए नहीं बना हूँ। कुछ लोग कहते है मैं अगर ये काम करूँगा तो लोग क्या कहेंगे, मुझ पर लोग हसेंगे। लेकिन वहीं कुछ लोग ऐसे भी है जो काम को कभी छोटा या बड़ा नहीं समझते। काम को बस काम समझते हैं और उसे पूरी लगन के साथ करते हैं। और उसको सही मुकाम तक पंहुचा देते हैं। ऐसी ही एक कहानी आज हम आपको बताने जा रहे हैं। जिसमे एक 62 वर्षीय महिला जो कभी स्कूल नहीं गई और ना ही कभी पढाई की लेकिन फिर भी आज कमा रही हैं महीने का 3.5 लाख रूपया।

कौन है वह महिला

नवलबेन दलसंगभाई चौधरी

आज हम बात कर रहे हैं गुजरात के बनासकंठा जिले में रहने वाली नवलबेन दलसंगभाई चौधरी की जिनकी उम्र 62 वर्ष हैं जिन्होंने कभी किताबी शिक्षा नहीं ली और न ही कभी स्कूल गई लेकिन आज उन्हें उनके काम से बहुत से लोग जानते हैं। और वह महीने का 3.5 लाख रुपये कमाती हैं।

कैसे कमाती हैं 3.5 लाख रुपये महीना

नवलबेन दलसंगभाई चौधरी

दरअसल नवलबेन दलसंगभाई चौधरी दूध बेच कर कमाती हैं 3.5 लाख रुपये महीना। अब आप सोच रहे होंगे की 3.5 लाख रूपए महीने का दूध कैसे बेच देती होगी। और कितना दूध बेच देती होगी जिससे उन्हें ३.५ लाख रूपए महीना मिल जाता हैं। तो हम आपको बता दे की नवलबेन दलसंगभाई चौधरी के pass 80 भैसें और 45 गाय है। जिससे उन्हें रोज का 1000 लीटर दूध मिलता हैं। और इस काम को वही चला रही हैं। हालांकि उन्होंने अपने फार्म में 11 लोगो को नौकरी पर रख रखा हैं जो नवलबेन दलसंगभाई चौधरी के मार्गदर्शन में काम करते हैं।

बता दे की नवलबेन दलसंगभाई चौधरी ने सन 2020 में कुल इस काम से एक करोड़ दस लाख रूपए का दूध बेचा हैं। हाल ही में अमूल डेरी के सीईओ आर एस सोढ़ी ने 2020 में एक ट्वीट कर 10 Millionaire Rural Women Entrepreneurs की फोटोज शेयर कर जानकारी दी थी। जिसमे नवलबेन दलसंगभाई चौधरी टॉप पर थी। जो की सबसे ज्यादा दूध बेचकर सबसे ज्यादा कमाई करने वाली महिलाओ की सूची में प्रथम स्थान पर है।

कई अवार्ड भी जीत चुकी हैं नवलबेन

कहते हैं न की अगर आप जिस काम को कर रहे है वो पूरी सिद्धत से करो तो आपको सफलता जरूर मिलती है। ठीक वैसा ही नवलबेन के साथ हुआ उन्हें उनके काम ने सम्मानित करवाया। और उन्हें 3 बेस्ट पशुपालक पुरस्कार और 2 लक्ष्मी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। और उनके इस काम से उनके गांव के लोग और आस पड़ोस के लोग भी काफी प्रेरित होते हैं। इसलिए कहा जाता है की कोई भी काम बड़ा या छोटा नहीं होता।

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