मिल्खा सिंह की तेज़ रफ़्तार ने उड़ा दिए थे पाकिस्तानी राष्ट्रपति के होश, मिला था फ्लाइंग सिख का ख़िताब।

Milkha Singh Journey

यह कोरोना काल बहुत ही बुरा समय बनकर हम सब के सामने आया है। कितने ही लोगो के परिवार के सदस्य चले गये और बीती रात शुक्रवार को हमारे भारत के एक महान धावक ने इस कोरोना बिमारी की वजह से हमें अलविदा कह दिया‌। महान धावक मिल्खा सिंह के लिए आज पूरे देश की आंखो में आंसू हैं। इन्होंने शुक्रवार रात करीब 11:30 पर इस दुनिया को अलविदा कह दिया। इनका इलाज चंडीगढ़ के एक अस्पताल में चल रहा था। पिछले एक माह से ये कोरोना वायरस से लड़ रहे थे, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

Milkha Singh

तेज रफ्तार के लिए पूरी दुनिया में जाने जाने वाले मिल्खा सिंह का जन्म साल 1929 में हुआ था। 91 वर्ष की अपनी आयु में इन्होंने दुनिया को अलविदा कहा। उनके गुज़र जाने पर पीएम मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार, शाहरुख खान, फरहान अख़्तर, हरभजन सिंह जैसी कई बड़ी हस्तियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।

उन्होंने कई मौके पर देश का नाम रोशन किया है। पुरी दुनिया में इन्हें “फ्लाइंग सिक्ख”के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि मिल्खा सिंह जब दौड़ते थे तो ऐसा लगता था मानो उनके पैरों में पंख लगे हुए हों। आखिर कैसे मिला फ्लाइंग सिक्ख का खिताब आइये जाने।

कैसे मिला था The Flying Sikh का ख़िताब

Milkha Singh The Flying Sikh

हम सभी जानते हैं कि मिल्खा सिंह को उनकी फर्राटेदार रफ़्तार के लिए ‘फ़्लाइंग सिख’ भी कहा जाता है। लेकिन बहुत कम ही लोगों को यह जानकारी है कि यह नाम दिवंगत मिल्खा सिंह को पाकिस्तान में मिला था‌। साल 1960 में मिल्खा को पाकिस्तान की ओर से लाहौर में दौड़ने का आमंत्रण मिला लेकिन भारत-पाक बंटवारे के बाद हुए दंगों से दुखी मिल्खा सिंह ने इसे अस्वीकार कर दिया।

जब मिल्खा ने पाकिस्तान से मिला आमंत्रण ठुकरा दिया तो भारत के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने मिल्खा को बुलाया और उनसे कहा कि पुरानी बातें भूलकर लाहौर जाओ। पंडित नेहरू की बात सुनकर मिल्खा ने पाकिस्तान जाने के लिए हामी भर दी। मिल्खा सिंह को सरहद के रास्ते पाकिस्तान ले जाया गया। वे खुली जीप में सवार होकर लाहौर पहुंचे‌।मैच देखने के लिए स्टेडियम में भारी जमा थी। पाकिस्तान में मिल्खा का मुकाबला होना था ‘एशिया का तूफान’ नाम से मशहूर पाकिस्तानी धावक अब्दुल खालिक से।

रेस शुरू होने के ठीक पहले कुछ मौलवी पाकिस्तानी धावक खालिक के पास आए और कहा कि खुदा आपको ताकत दे। सभी मौलवी जाने लगे तो मिल्खा सिंह ने उनसे कहा, रुकिए! हम भी खुदा के बंदे हैं। तब मौलवी ने उन्हें भी कहा कि खुदा आपको भी ताकत दे।

मिल्खा सिंह और खालिक के बीच हो रहे मुकाबले का आनंद तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान भी ले रहे थे। रेस शुरु हुई तो सभी की धड़कनें बढ़ गई।मिल्खा ने फर्राटेदार रफ़्तार से खालिक को मात दे दी और पाकिस्तान में इतिहास रच दिया। अयूब खान ने मिल्खा सिंह के गले में मेडल डालते हुए पंजाबी में कहा कि, ”मिल्खा सिंह जी, तुस्सी पाकिस्तान दे विच आके दौड़े नई, तुस्सी पाकिस्तान दे विच उड़े ओ, आज पाकिस्तान तुहानूं फ्लाइंग सिख दा खिताब देंदा ए।” इस तरह मिल्खा को नाम मिला ‘फ़्लाइंग सिख’।

उनकी तेज रफ़्तार देखकर तो पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान के भी होश उड़ गए थे और उन्होंने ही मिल्खा सिंह को फ़्लाइंग सिख का खिताब दिया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
error: Please do hard work...