नागपूर: बच्ची को रोता नहीं देख पाए स्वयंसेवक और अपनी जान दे दीं – पूरी खबर पढ़ कर आँखें भर जायेगी।

Swayamsevak Narayan Ji

जिंदगी में कुछ ऐसी कहानी या किस्सा सुनने को मिलता है जिसे सुनकर ऐसा लगता है जैसे की कोई पिक्चर का सीन हो। लेकिन अभी जो हालात देश में कोरोना से बिगड़े है वह तो किसी ने कभी सोचा भी नहीं था। आपकी जानकारी के लिए बता दे की कोरोना से पिछले 24 घंटों में 3 लाख 62 हज़ार से भी ज्यादा कोरोना के नए मामले सामने आए हैं। अस्पताल में भी बेड, ऑक्सीजन और दवाई की काफी कमी चल रही है हालांकि हर संभव मदद की जा रही हैं। लेकिन जो हम आपको बताने वाले है वह सुन कर आप हैरान हो जाओगे।

एक बुजुर्ग ने एक बच्ची की ख़ुशी के लिए अपने आप को कुर्बान कर दिया।

जो खबर हम आपको बताने वाले है वह ऐसी है जिसे सुनकर आपको हैरान ही नहीं, आपकी आँखें भर जाएगी। एक 85 साल के बुजुर्ग ने एक छोटी सी बच्ची के लिए वो कर दिखाया जो शायद की उसके घर-परिवार वाला कर पाता। दरअसल हुआ यूँ की छोटी सी बच्ची के पिता की तबियत ख़राब थी और उसको अस्पताल में भर्ती करने के लिए पलंग नहीं मिल रहा था। जिसे देख कर वह मौजूद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक श्री नारायण जी ने अपना बेड और बच्ची के पिता को देकर उसके प्राण बचा लिए और अपने हार गए।

आपको बता दे की नागपूर के स्वयंसेवक श्री नारायण जी को कोरोना हो गया था। जिसके बाद वह अपनी लड़की के साथ नागपूर के इंदिरा गाँधी हॉस्पिटल में भर्ती होने गए थे। जब वह काउंटर पर अपनी भर्ती की प्रक्रिया पूरी कर रहे थे तब उन्होंने एक छोटी सी बच्ची को रोते हुए देखा जिसकी माँ काउंटर पर अपने पति को भर्ती करने के लिए पलंग मिल जाए इसलिये गिड़गिड़ा रही थी। दोनों माँ और बेटी को देख कर स्वयंसेवक श्री नारायण जी का मन भर आया और उन्होंने अपना पलंग उसे लड़की के पिता को दे दिया।

पलंग देते हुए स्वयंसेवक स्वर्गीय श्री नारायण जी ने कहा कि – “मैं 85 वर्ष का हो चुका हूँ, जीवन देख लिया है, लेकिन अगर उस स्त्री का पति मर गया तो बच्चे अनाथ हो जायेंगे, इसलिए मेरा कर्तव्य है कि मैं उस व्यक्ति के प्राण बचाऊं।” ऐसा कहते हुए कोरोना पीडित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक श्री नारायण जी ने अपना बेड उस मरीज़ को दे दिया। और वापस घर लौट आए और दूसरे व्यक्ति की प्राण रक्षा करते हुए श्री नारायण जी तीन दिनों में इस संसार से चले गए।

लेकिन उनके इस कार्य से हर कोई हैरान है और उनके इस बलिदान से प्रेरणा भी ले रहे हैं। आपकी इस कार्य पर क्या राय है हमे प्लीज बताए ताकि हम भी समझ पाए। और अगर आप इस कहानी से प्रेरित हुए है तो जरूर शेयर करे।

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