राष्ट्रपति भवन में सम्मान प्राप्त करने, लाल कारपेट पर नंगे पैर पहुंचे यह असली हीरो कौन हैं?

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पिछले दिनों राष्ट्रपति भवन में भव्य समारोह में 2020 के लिए पद्म पुरस्कारों से लोगो को नवाजा गया। यहा पर कई हस्तियों को सम्मानित किया गया, जिसमे सभी तरह के लोह शामिल हुए है जिन्हें यह सम्मान दिया जाना था। “भारत रत्न” के बाद पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान होते है। इस बार इसमे कई आम आदमी को भी सम्मानित किया गया, जिहे आप और हम शायद नही जानते है।

कल का दिन सभी के लिए इतिहासिक रहा है, जहा राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति समेत देश की सबसे ताकतवर हस्तिया मुजुद थी, जहा चमकते फ्लैश और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच राष्ट्रपति भवन के रेड कार्पेट पर नंगे पांव साधारण से दिखने वाले लोग सम्मानित हुए आज हम आपको उनके बारे में बताने जा रहे है, की यह लोग कौन है।

हरेकला हजब्बा: संतरे बेचकर बच्चो के लिए बाया स्कूल

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इसमे एक आदमी ऐसा भी था जो संतरे बेचता है। बदन पर लुंगी लपेटी गई सफेद धोती। सफेद रंग का शर्ट और गले में लपेटा हुआ एक सफेद गमछा, पैरों में चप्पल तक नहीं, बिल्कुल नंगे पांव आया यह व्यक्ति कर्नाटक के हरेकला हजब्बा है। यह सड़कों पर टोकरी में संतरा रखकर घूम-घूमकर बेचा करते हैं। पढ़ाई के नाम पर ‘काला अक्षर भैंस बराबर’ यानी पूरी तरह अनपढ़ है। लेकिन उन्होंने गाँव में बच्चो के लिए स्कूल बनवाया। संतरा बेचकर पाई-पाई जुटाए पैसों से उन्होंने गांव में स्कूल खोला। यह स्कूल ‘हजब्बा आवारा शैल’ यानी हजब्बा का स्कूल नाम से जाना जाता है, जिसमे कई गरीब बच्चे पढ़ते है।

तुलसी गौड़ा : पर्यावरण योद्धा, ‘जंगल की इनसाइक्लोपीडिया’

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एक और व्यक्ति जो 72 साल की उम्र का था, जिसने बदन पर कपड़े के नाम पर जैसे कोई चादर चपेटी थी और नंगे पैर रेड कार्पेट पर दस्तक दी। सम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसी हस्तियां हाथ जोड़े अभिवादन कर रही हैं। यह हैं तुलसी गौड़ा जिन्हें पर्यावरण योद्धा इनसाइक्लोपीडिया ऑफ फॉरेस्ट’ के नाम से जाना जाता है। इन्होने अपना जीवन पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया।

यह 6 दशकों से पर्यावरण सुरक्षा का अलख जगा रहे है। इनका जन्म एक गरीब आदिवासी परिवार में हुआ और कभी स्कूल नहीं गईं लेकिन उन्हें जंगल में पाए जाने वाले पेड़-पौधों, जड़ी-बूटियों के बारे में इतनी जानकारी है कि उन्हें ‘इनसाइक्लोपीडिया ऑफ फॉरेस्ट’ कहा जाता है। इन्होने 12 साल की उम्र से अबतक करीब 30 हजार पौधे लगाकर उन्हें पेड़ का रूप दिया। और अभी भी एसी तरह के प्रयाश कर रही है।

राहीबाई सोमा पोपेरे : ‘सीड मदर’ के नाम से जानते है लोग।

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यह महिला राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों देश का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ हासिल कर रही हैं। जिनका नाम राहीबाई सोमा पोपेरे है, यह महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले की एक आदिवासी महिला है और यह खेती करती है। आज यह नारी सशक्तीकरण की सशक्त मिसाल है, इन्हें ‘सीड मदर’ के नाम से जाना जाता है। इन्होने जैविक खेती को एक नई ऊंचाई दी हैं। 57 साल की पोपेरे स्वयं सहायता समूहों के जरिए 50 एकड़ जमीन पर 17 से ज्यादा देसी फसलों की खेती करती हैं। इन्होंने कई तरह के बीजों को इकट्ठा करना शुरू किया और कई किसानो को वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए जैविक खेती के लिए जागरूक किया है।

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इस तरह से और भी कई लोगो को पद्म पुरस्कार प्रदान किया गया, आपको बता दे की, कुछ साल पहले तक यही माना जाता था कि पद्म पुरस्कार ज्यादातर उन्हीं को मिलते हैं जिनकी सत्ता के गलियारों में पहुंच हो। लेकिन आज ऐसा नही है, आज कई आम लोग इस सम्मान को पाते है। अब आम आदमी भी देश के इन सर्वोच्च पुरस्कारों से नवाजे जा रहे हैं। और गुमनामी से बाहर लोगो की नजर में आ रहे है।

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