राजस्थान की नौ चौकी सुखी झील, इस शिक्षक की कोशिशों से आज भर गई पानी से।

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हमारे देश में आज भी कई ऐसी झील और तालाब है। जो की काफी पुराने है, जो हमारे बुजुर्गों ने नदी, झील, तालाब, बावड़ी और कुंड के रूप में बनाये है। आज हमे भी इनका सरंक्षण करने की आवश्यकता है। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए एक शिक्षक ने यह करके दिखाया है।

इस व्यक्ति ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय द्वारा व्यक्तिगत श्रेणी में “राष्ट्रीय भूमि जल संवर्धन पुरस्कार” प्राप्त किया है। इनका नाम दिनेश श्रीमाली है जिन्होने अरसे तक झील को सूखने से बचाने के लिए जद्दोजहद की हैं।

Rajasthan Nou Chuki Jhil

“द बेटर इंडिया” से बात करते हुए श्रीमाली ने बताया,“जैसे ही झील सूखी, मेरी मानसिक स्थिति भी झील की तरह कमजोर होकर सूखने की कगार पर आ गई। उन्होंने सालों से चली आ रही परंपराओं की शरण ली, और तालाबों के पेंदे की गाद खेतों में डाली जाती रही है। मैंने किसानों को इस मुहिम से जोड़कर इस मिशन को आगे बढ़ाने और झील के पेंदे की गाद को निकालने के कार्य को करने के लिए सोचा। उन्होंने विश्वसनीय साथियों को साथ लेकर तय किया कि हम हर रोज़ पांच तगारी मिट्टी बाहर निकालने से अभियान की शुरुआत करेंगे।”

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उसके बाद जीटीवी रिपोर्टर पीयूष मेहता ने इस काम पर रिपोर्ट बनाकर प्रसारित कर दी। इसका फायदा यह मिला कि अब उनके साथ जिला प्रशासन सहित कई स्वयंसेवी संस्थान भी जुड़ने आ गए। उसके बाद मिशन में साथ देने के लिए 10,000 से भी ज्यादा लोग सूखी हुई झील में श्रमदान के लिए उतर चुके थे।

दो महीने बाद दिनेश को जिला प्रशासन ने बुलाया और ‘ऑपरेशन भागीरथी’ की शुरुआत की। श्रीमाली ने सुझाव दिया कि पूरा ढेर नहीं हटाकर बीच में से एक झिरी निकाल दी जाए, ऐसा करने में कोई भारी बजट भी नहीं लगेगा, साथ ही जनधन की कोई हानि का ख़तरा भी नहीं होगा। स्थानीय प्रकृति प्रेमियों के दबाव में प्रशासन ने सुझाव को मंजूरी दे दी।

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उसके बाद तकरीबन 10,000 टन मार्बल स्लरी हटाकर 3 दिनों में एक झिरी निकाली गई, पानी को आगे बढ़ने का रास्ता मिला। अगले 2-3 सालों में औसत बारिश हुई। 2009 में अच्छी बरसात होने पर झिरी वाले स्थान से बहकर गोमती व खारी नदी का पानी आया। इस तरह से कई वर्षो की मेहनत के बाद आज उनकी इस झील में पानी भर गया है इसमे आज 6 फिट पानी है।

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