रावण ने किन चार स्त्रियों पर अपनी कुदृष्टि डाली थी जिसके श्राप का कारण बना रावण की मौत !

Ravan Dahan

रावण, जिसे लंका का राजा कहा जाता था। रावण, जिसकी अनंतमय भक्ति से भगवान शिव भी मोहित थे। जिसकी भक्ति से उसने सोने की लंका पा ली थी। रावण, जिसके दस मुँह होने के कारण दशानन भी कहा जाता हैं। वही दशानन जिसके हर एक मुख पर अपनी योग्यता का मुकुट था। और वही रावण, जिसको मारना इतना आसान नहीं था। उसी रावण को स्त्रियों पर कुदृष्टि डालने के कारण उसका अजेय शरीर भी उसका साथ छोड़ गया।

रावण बहुज्ञानि और अनेक विद्याओं का जानकार था। लेकिन स्त्री के प्रति उसकी कुनियत ने उसे राम नहीं बनने दिया। और यही कारण हुआ की उसे स्त्री के श्राप के कारण रावण के हाथों मरना पड़ा।

किन किन स्त्रियों ने रावण को श्राप दिया था?

Ram Ravan Yudh

पुत्रवधु तुल्य रम्भा : वाल्मीकि रामायण के अनुसार जब रावण विश्व विजय बन कर स्वर्गलोक पहुंचा तो वहां उसे रम्भा नाम की एक अप्सरा मिली। जिस पर वह मोहित हो गया और रम्भा को अपनी और आकर्षित करने लगा। जिस पर रम्भा ने उससे बचने की कोशिश की और उसे अपना रिश्ता बताया। और यह भी कहाँ की वह उनके भाई कुबेर के पुत्र नलकुबेर की पत्नी हैं। और इस नाते वो उनकी पुत्रवधू के समान हैं। यह सब सुनने के बाद भी रावण ने अपनी कुदृष्टि उस पर से नहीं हटाई। जिसके बाद नलकुबेर ने रावण को श्राप दिया की अगर वो किसी स्त्री की इच्छा के विरुद्ध उसे स्पर्श करेगा तो उसकी मौत हो जाएगी।

वेदवती : रावण जब पुष्पक विमान से कहीं जा रहा था तो जाते समय उसकी नजर एक साधना कर रही स्त्री पर पड़ी। जिसकी सुंदरता देख कर रावण मोहित हो गया और उस स्त्री को अपने साथ चलने को कहाँ। स्त्री भगवान विष्णु की अपने पति रूप में देखने के लिए कठोर तपस्या कर रही थी। जिसका नाम वेदवती हैं। वेदवती के मना करने पर रावण ने उसके बाल पकड़ कर पुष्पक की तरफ घसीटा जिस पर वेदवती क्रोधित हो गई। और योगशक्ति से उसने अपनी देह त्याग दी। और रावण को श्राप दिया की तुम्हारी मृत्यु एक स्त्री के कारण ही होगी।

Sita haran

माया की माया : रावण ने अपनी पत्नी की बहन को भी अपनी कुदृष्टि से नहीं छोड़ा। रावण ने अपनी पत्नी की बहन माया पर भी कुदृष्टि डाली थी। माया के पति राजा शंभर थे। राजा शंभर वैजयंतपुर के राजा थे। जब रावण शंभर राज्य गया तो वह माया की सुंदरता पर मोहित हो गया। और रावण माया को अपनी बातों के जाल में फ़साने लगा। जिससे क्रोध में आये राजा शंभर ने रावण को बंधी बना लिया था। जिसके कुछ समय पश्चात शंभर राजा दशरथ से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। जिसके बाद रावण ने फिर माया को अपने साथ ले जाने की कोशिश की। जिस पर माया ने पति की चिता पर सती होते हुए रावण को श्राप दिया कि तुम भी युद्ध में मृत्यु के गाल में समा जाओगे।

Ravan Dahan

सीता का अपमान : सीता को साध्वी वेदवती का पुनः जन्म भी माना जाता हैं। भगवान राम कि पत्नी सीता का रावण द्वारा साधु बनकर धोके से हरण करना तो सबने सुना ही होगा। और यह दुनिया में प्रसिद्ध भी हैं। सीता का हरण ही रावण कि एक ओर गलती थी जिसने रावण को मृत्यु मृत्यु कि नींद सुला दिया। सीता के हरण के बाद ही राम ने लंका पर चढ़ाई शुरू कर दी थी। रावण कि लंका में अशोकवाटिका में माता सीता ने एक घास के तिनके से अपने सतित्व कि रक्षा कि थी और रावण को सचेत किया था कि वो उन्हें सकुशल राम के पास छोड़ आए अन्यथा राम – लखन के द्वारा युद्व में उसकी मृत्यु हो जाएगी।

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