25 साल से जकड़ी बहन की दर्दनाक कहानी – पायल की जगह बेटी के पैरो में बेड़िया।

rakhi

हम आज आपको एक लड़की की दिल दहला देनी वाली घटना को बताने जा रहे है। जिसे सुनकर आपका दिल भी पिघल जाएगा। जहा आज सभी बहने अपने भाइयो की कलाई पर राखी बांध रही है, वही एक बहन ऐसी है जो अपने ही घर में बेड़ियों से  जकड़ी हुई है। इसे हम कुदरत का कहर कहें या फिर प्रशासन की बेरुखी। यह घटना राजस्थान के चूरू की है, जहा जिला मुख्यालय के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से चंद कदमों की दूरी पर ही एक बेटी 25 साल से जंजीरों में जकड़ी हुई है। 

इस बेटी को मजबूर परिजन उसे बकरियों के साथ टीनशैड के नीचे बांधकर रखते हैं, यह सभी मौसम में यही रहती है चाहे गर्मी हो, सर्दी हो या फिर बारिश का मौसम उसके लिए टूटी हुई चारपाई ही बिछौना है और आसमान ही ओढ़ना। 

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आज 28 साल की लक्ष्मी नारकीय जीवन जीने को मजबूर है, चुरू के नयाबास की रहने वाली लक्ष्मी को 3 साल की थी  तभी से मानसिक रोग हो गया था। उसके बाद यह बीमारी बढ़ती गई, वैसे-वैसे उस पर और पाबंदियां लगाई गईं और फिर स्थिति गंभीर होने पर उसे बेड़ियों में जकड़ दिया गया। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसी योजनाओं के बाद भी प्रशासन का ध्यान इसके उपचार पर नहीं गया है। 

लक्ष्मी का इलाज उनके परिजनों ने बहुत करवाया है। उसके इलाज के पीछे लाखों रुपये खर्च कर चुके इस परिवार की आर्थिक हालत अब कमजोर हो चुकी है। अब परिजन सरकार से आस लगाए उस दिन का इंतजार कर रहे हैं क्युकी उनके पास अब इतना पैसा नहीं है की वह इसका इलाज करवा सके। उन्हें अब भी इंतजार है की, उनकी बेटी पूरी तरह से स्वस्थ्य होकर अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधेगी।

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अब लक्ष्मी के माँ बाप बूढ़े हो चुके है, उसके इलाज पर अब तक करीब 5 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं लेकिन वह ठीक नहीं हो पायी है। उन्होंने उसके इलाज के लिए अपने पशु तक बेच दिए है। लेकन जब वह ठीक नहीं हुई तो उनोहने थक हार के उसे जंजीरों से बांधकर रखने के अलावा कोई उपाय नहीं बचा है। छह भाई-बहनों में लक्ष्मी 5 वें नम्बर पर है। 

लक्ष्मी के पिता ने बताया की हम पति-पत्नी उसे अकेला छोड़कर किसी रिश्तेदार या परिजन के कार्यक्रम में शरीक नहीं हो सकते। क्युकी लक्ष्मी को रह-रहकर दौरे पड़ते हैं तो पूरी तरह से आपा खो देती है। इसलिए उसे सँभालने वाला भी घर पर चाहिए। कई बार जंजीर खुलने पर वह बिना बताए घर से निकल चुकी है, उसे ढूंढकर लाने में परेशानी होती है। पिता मजदूरी करके आप पेट पालते है। लक्ष्मी के पिता का कहना है कि सरकारी सहायता मिले तो बेटी के स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

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