सोनिया गांधी ने क्यों राजीव गांधी की ताबूत से उठा ली थी एक माला? जानिए इसके पीछे की कहानी

Sonia Gandhi Rajiv Gandhi

गाँधी नेहरू परिवार देश के आजाद होने के बाद भी सक्रीय है, लेकिन समय ऐसा भी था जब सोनिया गांधी अपने पति राजीव गाँधी से यह नहीं चाहती थी कि राजनीति में सक्रिय रूप से भूमिका निभाएं। बहुत ही कम लोगो को यह बात पता है पर यह बात सच है। सोनिया गांधी का इस बारे में कहना था की वह राजनीति करना नहीं चाहती थी और यह भी नहीं चाहती थी कि उनके पति राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) राजनीति करें।

Sonia gandhi Rajiv Gandhi (1)

इसके पीछे वजह कुछ भी हो सकती है, लेकिन इसमें इन वजहों में इंद्रा गाँधी की हत्या भी हो सकती है। इंदिरा गांधी की हत्या के कारन वह राजीव गांधी को एकर बहुत चिंतित थी और राजीव गाँधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी भी हत्या कर दी गई। आइये जानते है सोनिया से जुडी कुछ खास बाते।

sonia gandhi

सोनिया गांधी ने तीन की मौत देखि उनमें से संजय गांधी फिर उनकी सास इंदिरा गांधी और अंत में उनके पति राजीव गांधी की मौत हुई थी। सोनिया के लिए यह किसी कठोर दुख से कम नहीं था। आपको बता दें कि इंदिरा गांधी की मौत के बाद सोनिया गांधी नहीं चाहती थी कि उनके पति राजीव गांधी राजनीति में आए लेकिन वह उनकी माँ की बात को ठुकराना नहीं चाहती थी। सोनिया गांधी का मानना था कि अगर राजीव गांधी राजनीति में आए तो उनकी खुशियां छीन जाएगी मुझे और ऐसा साबित हो गया। जब राजीव गांधी की मौत हुई तो सोनिया को बड़ा ही दुख हुआ था वह एक दम टूट चुकी थी।

सोनिया गांधी ने अपने पति मृत्यु के बाद उनके ताबूत पर रखी मोगरे की माला क्यों उठाई

Rahul gandhi

सोनिया गांधी को जब यह पता चला कि राजीव गांधी की मद्रास में बम विस्फोट में मृत्यु हो गई है, तो इससे तो उनकी चीख ऐसी निकली की पूरा PM हाउस गूंज उठा था, इस कारण उन्हें अस्थमा का अटैक आ गया। जब सोनिया गांधी वहां पहुंची तो उन्होंने अपने पति राजीव गांधी को देखने की इच्छा व्यक्त की वहां उनके सामने दो ताबूत पड़े थे, इन ताबूत में एक शव राजीव गांधी का था और राजीव गांधी के सुरक्षा अधिकारी प्रदीप गुप्ता का शव वहां दूसरे ताबूत में था।

Rajiv Gandhi

सोनिया गांधी पर स्पेनिश जेवियर मोरो ने किताब लिखी “द रेट साड़ी” उसमें बताया गया कि प्रदीप गुप्ता के ताबूत पर कोई फूल नहीं चढ़े थे, इसलिए सोनिया गांधी ने राजीव गांधी के ताबूत पर से मोगरे की माला उठाकर प्रदीप गुप्ता की ताबूत पर सजा दी।

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