इस चूहे की बहादुरी को मिला गोल्ड मैडल – बचाई हज़ारों लोगों की जान, महसूस होगा गर्व।

Magawa Rat Story

एक गजब का चूहा जिसने अपनी सूंघने की क्षमता से सुरंगों का पता लगाया और हजारों लोगों की जान बचाई। इसे ट्रेनिंग के द्वारा तैयार किया गया। अपनी ट्रेनिंग के दौरान इसने 38 जिंदा विस्फोट का पता लगाया। इसे अपनी बहादुरी के लिए पुरस्कार भी प्राप्त है।

चूहे की गजब कहानी

Magawa Rat Story

मगावा अफ्रीकी नस्ल का एक चूहा है। इस बहादुर चूहे ने अपनी सूंघने की क्षमता से सुरंगों का पता लगाया और हजारों लोगों की जान बचाई। मगावा को बेल्जियम के गैर-लाभकारी संगठन ने ट्रेनिंग दी थी। अपनी सेवा के दौरान मगावा ने पांच साल तक बारूदी सुरंगों का पता लगाया। इसने दक्षिण पूर्व एशियाई देश कंबोडिया में बारूदी सुरंगों का पता लगाने का काम बहुत जिम्मेदारी के साथ किया।

मगावा को एपीओपीओ नामक संगठन ने ट्रेनिंग दी थी। यह संगठन चूहों को बारूदी सुरंगों और अस्पष्टीकृत विस्फोटों का पता लगाने के लिए ट्रेनिंग देता है।मगावा ने 1,41,000 वर्ग मीटर से अधिक की जमीन की पड़ताल की है जो कि 20 फुटबॉल मैदानों के बराबर है।

हज़ारों लोगों की जान बचाई

Magawa Rat Retired

मगावा की ट्रैनिंग इस प्रकार से थी की वह बारुदी सुरंगों का पता लगाकर अपने हैंडलर को सूचित कर सके। अपनी बहादुरी से इसने हजारों लोगों की जान बचाई। अपनी ड्यूटी के कार्यकाल में इसने 38 जिंदा विस्फोटों का पता लगाया। अपनी ड्यूटी के पांच साल बाद इसे अब रिटायरमेंट मिल चुका है।

मगावा को अपनी बहादुरी के लिए पुरूस्कार के तौर पर मेडल भी मिल चुका है। उसे यह मेडल ब्रिटिश चैरिटी द्वारा प्राप्त हुआ है। जानवरों के लिए जो शीर्ष पुरस्कार था वह विशेष रूप से कुत्तों के लिए आरक्षित था‌। मगावा ने उसे अपने नाम पर कर लिया है। मगावा की पांच साल की सेवा के बाद उसे रिटायर्ड किया गया। जिस एपीओपीओ संगठन ने इसे ट्रेनिंग दी उनका कहना है मगावा अभी भी अच्छे स्वास्थ्य में है। लेकिन वह अपनी रिटायरमेंट की आयु तक पहुंच गया है इसलिए वह अब सुस्त रहने लगा है।

रिटायर होने के बाद भी मिलेगी स्वास्थ्य सेवा

Magawa Rat Retired

मगावा की हैंडलर कहती हैं कि उसने अपनी सेवा में बेहतरीन काम किया है और अपनी बहादुरी से हजारों लोगों की जान बचाई है। वे कहती हैं, “वह छोटा है लेकिन मुझे उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने पर गर्व है।” एपीओपीओ की प्रवक्ता लिली शैलॉम कहती हैं कि रिटायरमेंट के बाद भी मगावा उसी पिंजरे में रहेगा जिसमें वह ड्यूटी के दौरान रहता था। उसे उसी तरह का भोजन मिलेगा, खेलने का समय मिलेगा। नियमित व्यायाम और उसकी स्वास्थ्य जांच भी होगी।

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