पहले स्कूल में था माली, फिर उसी स्कूल का बन गया प्रिंसिपल – जानिये इस शख़्स की कहानी को।

Ishavar Singh Baadgaah

आज हम आपको सफलता की एक ऐसी प्रेणादायक शख़्स की कहानी के बारे में बताने जा रहे है, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से एक लम्बा सफर तह किया है। वह खुद भी नहीं जानते थे की उनकी किस्मत में क्या लिखा है। लेकिन उन्होंने आज एक ऐसा मुकाम प्राप्त किया है, जो आज उन्हें जीवन में एक नई पहचान दिलाने में सफल रहा है। 

हम आपको छत्तीसगढ़ के भिलाई के में रहने वाले ईश्वर सिंह बादगाह के बारे में बताने जा रहे है। इन्होने अपने जीवन मे कई मुसीबतों का सामना किया और अपने लक्ष्य पर डटे रहे।

जिस कॉलेज में पौधों को सींचा, वहीं बनें प्रिंसिपल

Ishavar Singh Baadgaah Success Story

किस्मत बदलते देर नहीं लगती हैं, ऐसा ही कुछ ईश्वर सिंह बादगाह के साथ हुआ है। इन्होंने अपनी किस्मत अपनी मेहनत के बदौलत बदली है, इसके लिए इन्होने काफी संघर्ष किया है। एक समय ऐसा था, जब ईश्वर सिंह कल्याण कॉलेज में माली हुआ करते थे लेकिन आज वह अपनी मेहनत और धैर्य के बदौलत उसी कॉलेज में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत है।

Ishavar Singh Baadgaah Success Story in Hindi (1)

ईश्वर सिंह बादगाह का जन्म बैठलपुर के ‘घुटिया’ में हुआ था। यह 12वीं तक अपने गांव के स्कूल में पढ़े आर्थिक स्थिति सही नही होने के कारण इनको बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी इसके बाद यह 19 साल की आयु में घर के खर्चों के पैसो के लिए इन्होंने नौकरी तलाशनी शुरू कर दी। जिसके लिए वह भिलाई गए यहां उन्होंने कपड़ा स्टोर में सेल्समैन की नौकरी की। इसके लिए उन्हें मात्र 150 रुपये  महीना मिलता था। लेकिन इनके मन में आगे की पढाई करने की इच्छा थी। 

बीए की डिग्री हासिल करने के लिए फार्म भर दिया

Success Story of Ishavar Singh Baadgaah in Hindi

पढाई करने के लिए उन्होंने कल्याण कॉलेज में अपनी बीए की डिग्री हासिल करने के लिए फार्म भर दिया और कपड़े की दुकान में नौकरी करने के साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। जब उनका कॉलेज में एड्मिशन हो गया उसके बाद उन्होंने उसी कॉलेज में माली की नौकरी करना शुरू कर दी जिससे वह काम के साथ साथ पढाई कर सके। 

डिग्री पूरी करने के बाद उसी कॉलेज में टीचर बन गए

वर्ष 1989 में ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की उसके बाद इसी कॉलेज में क्राफ्ट टीचर की नौकरी मिल गई। बाद में इनकीयोग्यता और लगन को देखते हुए कॉलेज में इनको असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त कर दिया गया। इसी दौरान इन्होंने एमएड, बीपीएड और एमफिल की पढ़ाई पूरी कर इसकी डिग्री भी हासिल कर ली और वर्ष 2005 में इनको कल्याण कॉलेज के प्रधानाचार्य के रूप में चुन लिया गया।

ईश्वर सिंह का कहना है की इस मुकाम तक पहुंचने में काफी कोशिश करना पड़ी। वह हमेशा से सेक्यूरिटी फ़ोर्स में काम करना चाहते थे, जिसके लिए कई बार टेस्ट दिया लेकिन वो उसमे सफल नहीं हो सके। और किस्मत से वह आज कॉलेज के प्रधानाचार्य बन गए।

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