भेड़ चरा रहा युवक करोड़पति बन गया, मैदान से मिला 103 किलो का पत्थर और बदल गई पूरी किस्मत!

Bhed charane wala bna crorepati

आपने कई बार सुना होगा की “ऊपर वाला जब भी देता है, देता छप्पर फाड़ कर”। लेकिन अब आप सोच रहे होंगे की हम आपको यह बात को बता रहे हैं। तो आपको बता दे की जो आज हम आपको बताने वाले है वह इस पर ही आधारित हैं। और ऐसे ही उस शख्स की किस्मत बदल गई। जी हां, हम आपसे यूके के कॉट्सवोल्ड्स ग्रामीण युवक की बात कर रहे हैं। जिसके हाथ में अचानक से उल्कापिंड के दो छोटे टुकड़े हाथ लग गए। जिसकी कीमत 1 करोड़ रूपए तक बताई गई। लेकिन उस युवक ने उन पत्थरों को दान कर दिया।

जिस युवक की हम आपसे बात कर रहे है वह दरअसल यूके के कॉट्सवोल्ड्स ग्रामीण इलाके का रहने वाला है जो भेड़ चराता हैं। और एक दिन जब वह भेड़ चराने गया तो उसके हाथ उल्का पिंड के दो छोटे टुकड़े लगे। जिसकी कीमत जानने के बाद भी उसने उन दोनों उल्कापिंड को म्यूज़ियम में दान देने कर फैसला कर लिया। बताया जा रहा है की ये दोनों उल्का पिंड 4 बिलियन साल पुराने है और इसकी मदद से स्पेस में जीवन के चांस के रहस्य पर से पर्दा भी उठाया जा सकता हैं।

पत्थर को देखने में लग रहा था आम टुकड़ा

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ये पत्थर के टुकड़े देखने में तो बहुत ही आम पत्थर के जैसे दिखते हैं। लेकिन असल में ये पत्थर बेशकीमती निकले। बताया जा रहा है की ये पत्थर पिछले 4 बिलियन सालों से स्पेस में तेर रहे है। जो अब जा कर इस साल फरवरी में पृथ्वी पर गिरे हैं। और वो भी भेड़ चराने वाले मैदान में। इन पत्थरों की कीमत 1 करोड़ रूपए आंकी गई थी लेकिन फिर भी भेड़ चराने वाले युवक ने इसे डोनेट कर दिया। और अब ये 17 मई से Natural History Museum में डिस्प्ले पर लगाए जाएंगे।

क्यों है यह पत्थर इतना खास

आपको बता दे की इस पत्थर का नाम Winchcombe meteorite रखा गया हैं। जो की काफी रेयर उल्कापिंड हैं। जिसे कार्बनेशियस कोंड्राईट का एक प्रकार भी कहा जाता हैं। बताया तो यह भी जाता है की बीते 30 सालों में यूके में मिला यह पहला पत्थर हैं। जो की आसमान से नारंगी और हरे रंग के साथ गोले की तरह गिरता हुआ यह उल्का पिंड कैमरा में कैद हुआ था। इससे पहले यह पत्थर कभी भी जमीन पर नहीं पाया गया था।

गड़गड़ाहट के साथ गिरा था यह पत्थर

भेड़ चराने वाले उस युवक की माने तो यह पत्थर गड़गड़ाहट के साथ जमीन पर गिरा था। जिसके गिरने की आवाज युवक ने सुनी थी। और जब वह मैदान में पंहुचा तो उसे 103 किलो का पत्थर मिला था। बता दे की जिस चरवाहे के मैदान में यह पत्थर गिरा था वह 57 साल का विक्टोरिया बांड हैं। विक्टोरिया बांड ने बताया की जब यह पत्थर गिरा तो उसके घर कम से कम 5-7 वैज्ञानिक आए थे। जिन्होंने युवक को पत्थर के बदले 1 करोड़ रूपए देने की भी कही थी। लेकिन जैसे ही उस व्यक्ति को यह बात पता चली की यह उल्का पिंड स्पेस की अहम जानकारी भी दे सकता है तो उसने फिर इसे डोनेट कर दिया।

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