अगर देशवासियों के लिए नहीं थे पूरे टीके तो विदेश क्यों भेजे गए? संबित पात्रा ने बताई असली वजह।

Sambit Patra on Vaccine Fight

यह तो हर किसी को पता है की भारत ने हर देश की रक्षा करने और कोरोना से बचाने के लिए 90 से भी ज्यादा देशों को कोरोना वैक्सीन की डोज़ भारत ने भेजी थी। लेकिन अब सवाल ये उठ रहा है की आखिर भारत ने दूसरे देशों की मदद करने की बजाए अपने ही देश के लोगो को वैक्सीन क्यों नहीं लगाई। इसमें भी दो तरह के लोग है जिसमे कुछ लोग बोल रहे है की भारत ने बहुत ही अच्छा कार्य किया और इससे भारत का कद देश दुनिया में ऊँचा होगा। और आने वाले समय में हर कोई भारत की मदद करेगा और वह हो भी रहा हैं। लेकिन इसके साथ ही दूसरी तरफ ऐसे भी लोग है जिनका ये मानना है की भारत को पहले अपने देश के नागरिकों को वैक्सीन लगानी थी उसके बाद विदेशों में भेजना थी।

क्यों भेजी गई विदेशों में वैक्सीन

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यह तो बात हुई आम जनता की जो क्या सोचती हैं वह हमने आपको बताया लेकिन इस मुद्दे पर कई दिनों से हर विपक्षी दल मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। जिसका जवाब देते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने जवाब देते हुए कहा की भारत ने अपने पड़ोसी राष्ट्रों और संयुक्त राष्ट्र की पीसकी¨पग फोर्स के लिए जरूर एक करोड़ वैक्सीन भेजी हैं लेकिन बाकी के लगभग साढ़े पांच करोड़ वैक्सीन अंतरराष्ट्रीय बाध्यता के बाहर भेजी गईं हैं।

इसके आगे संबित पात्रा ने राहुल गाँधी और अरविन्द केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा की देश में दस साल तक रिमोर्ट की सरकार चलाने वाले राहुल गाँधी भी इसे अच्छे से समझते है और सात साल से दिल्ली सरकार चला रहे अरविन्द केजरीवाल भी इसको भली भाती जानते है और समझते होंगे। लेकिन वह सिर्फ आपदा में राजनीति करने का अवसर तलाश रहे है। और लोगों के मन में मोदी सरकार के प्रति भ्रम फ़ैलाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। और अपनी नाकामी छिपा रहे हैं।

यह ख़ास कारण होता है विदेशों में वैक्सीन भेजने का

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दिल्ली सरकार ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा की पूरी दिल्ली के लोगों को 3 महीने में टिका लगाना चाहते है लेकिन वैक्सीन ही नहीं हैं। भारत के लोगो के लिए वैक्सीन नहीं है और केंद्र सरकार ने दूसरे देशों में साढ़े छह करोड़ वैक्सीन दे दी। इसके साथ कांग्रेस नेता ने भी इसी प्रकार केंद्र सरकार पर आरोप लगाया।

जवाब देते हुए बुधवार को संबित पात्रा ने कहा की एक करोड़ सात लाख वैक्सीन मदद के रूप में भेजी गई हैं। जिसमे से 78 लाख वैक्सीन पड़ोस के सात मुल्कों में दी गई हैं। जो की कूटनीति ही नहीं इस महामारी को रोकने की कोशिश भी हैं। क्योकि कोई भी वायरस या बीमारी सीमाओं को नहीं मानती हैं। इसके साथ ही दो लाख वैक्सीन संयुक्त राष्ट्र की पीसकी¨पग फोर्स को दी गई हैं जो की एक अंतराष्ट्रीय जिम्मेदारी होती हैं। क्योकि इस फाॅर्स में भारत के भी साढ़े छह हजार जवान हैं।

वैक्सीन कंपनी का विदेशों से होता है समझौता

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संबित पात्रा ने आगे जानकारी देते हुए वाणिज्यिक और लाइसेंस बाध्यता को भी समझाया और बताया की सीरम इंस्टिट्यूट और भारत बायोटेक दोनों ही कंपनी ने विदेशों से कच्चा माल मंगवाया था। और उस समय कम्पनियों का उन देशों से समझौता हुआ था की हम एडवांस पेमेंट के तौर पर आपको वैक्सीन की कुछ डोज़ भेजेंगे। कोविशील्ड निर्माता कंपनी सीरम के लाइसेंस की बात करे तो उसे लाइसेंस भी विदेशी कंपनी ऑक्सफ़ोर्ड एस्ट्राजेनेका ने दिया था। और विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोवैक्स कार्यक्रम में कई देशों की हिस्सेदारी हैं। जिसके तहत वैक्सीन का एक हिस्सा अनिवार्य रूप से देना होता हैं।

वैक्सीन खरीदना नहीं चाहते अरविंद केजरीवाल

Sambit Patra

दिल्ली सरकार को घेरते संबित पात्रा ने कोई कसर नहीं छोड़ी और अरविंद केजरीवाल की पोल खोल दी। संबित पात्रा ने कहा की अरविंद केजरीवाल और सिसोदिया गन्दी राजनीति करने में लगे हुए हैं। पात्रा ने आगे कहा की दिल्ली सरकार बोल रही है की उन्होंने एक करोड़ वैक्सीन का आर्डर दिया हैं। जिसका जवाब देते हुए संबित पात्रा ने दिल्ली सरकार का पत्र दिखाया जिसमे कंपनी को कहा गया की वह वैक्सीन खरीदना चाहते हैं। इस पर संबित पात्रा ने बड़े ही मजाकिया ढंग से जवाब देते हुए कहा की “चाहत और वास्तविकता में काफी फर्क होता हैं।” अगर खरीदना चाहते है तो यह तय करना होता है की वे कितना एडवांस दे रहे है और कितनी डोज़ कब-कब चाहिए। लेकिन दिल्ली सरकार तो सिर्फ दिखावा करना चाहती है और वही कर रही हैं।

केंद्र सरकार लगातार बढ़ा रही उपलब्धता

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संबित पात्रा ने दूसरी कंपनी के लाइसेंस दिये जाने पर भी साफ़ किया की सीरम इंस्टिट्यूट तो खुद किसी से लाइसेंस ले कर काम कर रहा हैं और बात रहती है कोवैक्सीन की तो सरकार ने पहले से ही पैनेसिया फार्मा के साथ साथ हेफ्किन फार्मास्यूटिकल लिमिटेड, इंडियन बायोलाजिकल लिमिटेड सहित कुछ और अन्य पीएसयू को भी इसमें जोड़ने की तैयारी कर ली हैं। केंद्र सरकार इसमें पूरी तरह से वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पूरी तरह से कृतज्ञ हैं। लेकिन जिस तरह से केजरीवाल जी बोल रहे है की किसी भी कंपनी का फार्मूला ही दिया जा सकता। तो बता दू की जैविकीय सुरक्षा की जरुरत होती हैं वरना हादसे का भी डर रहता हैं।

हालांकि आपने इस पूरी खबर को पढ़ा और समझा। तो आपको क्या लगता है इस प्रकार की राजनीति करके देश की आम जनता को जिस प्रकार विपक्षी दल गुमराह कर रहे है वह सही हैं या गलत? क्योकि जिस समय में केंद्र के साथ मिल कर काम करना चाहिए उस समय में आरोप लगाना और केंद्र को नीचा दिखाना सही नहीं हैं। आप भी अपनी राय कमेंट करके हमे जरूर दे।

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