24 घंटे में मरने वाला था पति, बीवी बोली मुझे बच्चा चाहिए, फिर जो हुआ आप देख कर दंग रह जायगे।

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सभी महिला के लिए उसका पति ही सबकुछ होता है। लेकिन कभी कभी जीवन में ऐसे भी मोड़ आते है, जिसके कारण उन्हें अपना सुखद जीवन बिताने और परिवार आगे बढ़ाने का मौका नहीं मिल पाता है। और यदि बच्चे होने से पहले ही पति का देहांत हो जाता है। तो यह सबसे दुखद घड़ी होती है। ऐसा ही कुछ गुजरात के वडोदरा में इस महिला के साथ होने जा रहा था।

पति दो महीने से वेंटिलेटर पर है।

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इस महिला का पति कोरोना के कारण बीते दो महीने से वेंटिलेटर पर था। जिससे उसके फेफड़े बुरी तरह खराब हो चुके थे। डॉक्टर्स ने भी उन्हें बचाने से मना कर दिया था। बीमार शख्स की पत्नी से कहा कि आपके पति के पास अब कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में पत्नी ने अपने पति की आखिरी निशानी को अपनी कोख में रखने का फैसला किया। वह महिला चाहती थी कि पति के मरने से पहले वह उसके बच्चे की मां बन जाए। लेकिन यह नामुमकिन सा काम था। महिला के पास सिर्फ 24 घंटे ही बचे थे, जिसके बाद उसका पति मर जाता। 

महिला ने जो किया उससे सभी हैरान हो गए।

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इन दोनों की प्रेम कहानी की शुरुआत आज से चार साल पहले कनाडा में शुरू हुई थी। वहा उन्हें एक दूसरे से प्यार हो गया, दोनों ने अक्टूबर 2020 को शादी रचा ली। शादी के चार महीने बाद महिला के ससुर की तबीयत अचानक बिगड़ गई। जिसके बाद यह पति संग वडोदरा आ गई। इस दौरान महिला का पति भी कोरोना की चपेट में आ गया।

पति को इलाज के लिए 10 मई को अस्पताल में एडमिट किया गया। वह दो महीने तक जिंदगी और मौत के बिच संघर्ष करता रहा। डॉक्टरों ने महिला से कहा कि आपके पति के पास सिर्फ तीन दिन हैं। ऐसे में महिला ने डॉक्टर्स के सामने  बच्चे के लिए एक अजीब मांग रख दी। उसने कहा कि वह अपने पति का स्पर्म चाहती है ताकि उसके अंश से भविष्य में अपने बच्चे को जन्म दे सके।

IVF Process

डॉक्टरों ने महिला के प्रेम के प्रति सम्मान जताया और कहा कि मेडिको लीगल एक्ट के अनुसार पति की मंजूरी के बिना स्पर्म सैंपल नहीं लिया जा सकता है। ऐसे में महिला गुजरात हाईकोर्ट में गुहार लगाने जा पहुंची। लेकिन उसके पास सिर्फ 24 घंटे का ही समय शेष रह गया था। महिला ने सोमवार शाम हाईकोर्ट में याचिका लगा कर दूसरे दिन अर्जेंट सुनवाई की गुहार लगाई। जब हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच के सामने ये मामला आया तो वह भी हैरान रह गए, आश्चर्यजनक रूप से उन्होंने महज 15 मिनट में महिला के हित में फैसला सुना दिया।

उसके बाद महिला के पति के नमूने ‘आईवीएफ असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) प्रक्रिया के लिए एकत्र कर लिए गए। इस बात से महिला के सास-ससुर भी बहुत खुश हुए।

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